अंतरराष्ट्रीय कानून का अर्थ, परिभाषा, महत्व

अंतर्राष्ट्रीय कानून, कानून की वह शाखा है, जिसमें राष्ट्र-राज्यों के बीच के आपसी संबंधों को विनियमित करने वाले नियम शामिल है। यह एक परंपरागत और प्रथागत नियमों का ऐसा निकाय है जो राष्ट्र राज्यों द्वारा एक दूसरे के साथ संबंधों में कानूनी रूप से बाध्यकारी होते है। 

अंतरराष्ट्रीय कानून की परिभाषा

अंतरराष्ट्रीय कानून की कुछ प्रमुख परिभाषाएं हैं-

1. ओपेनहाइम के अनुसार, “अंतरराष्ट्रीय कानून उन परंपरागत नियमों का समूह है, जिन्हें सभ्य राष्ट्र अपने आपसी व्यवहार में वैधानिक रूप से बाध्यकारी समझते हैं।

2. सर हेनरीमैन ने अंतरराष्ट्रीय कानून को एक जटिल व्यवस्था माना है, जो विभिन्न घटकों से मिलकर बनती है। इसमें न्याय और अधिकारों के सामान्य सिद्धांतों जो राष्ट्रों के संबंधों तथा आचार-व्यवहार को अनुकूल बनाते है, के साथ ही यह परंपराओं, रीतियों तथा विचारों का भी संग्रह है जो सभ्यता व व्यापार का विकास करते हैं। उनके अनुसार यह सकारात्मक विधि संहिता है।

3. जे. सी. स्टार्क के अनुसार, “अंतरराष्ट्रीय कानून ऐसे वैधानिक कानूनों का समूह है, जिसके अधिकांश भाग का निर्माण उन नियमों और सिद्धांतों से निर्मित होता है, जिसका पालन करने के लिए राष्ट्र अपने को बाध्य समझते है और इसलिए परस्पर संबंधों में इनका उपयोग करते है। 

स्टार्क ने इसमें दो तत्वों को सम्मिलित किया है- 1) अंतरराष्ट्रीय संगठनों तथा संस्थाओं की कार्यप्रणाली से, उनके परस्पर आपसी संबंध एवं राज्य तथा व्यक्ति के साथ उनके संबंधों के बारे में कानून व नियम। 2 ) व्यक्तियों तथा गैर राज्य अभिकर्ताआंे से संबंधित नियम। इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय कानून उन क़ानूनी नियमों, मानदंडों और मानकों का निकाय है जो संप्रभु राष्ट्र-राज्यों और अन्य इकाइयां े के बीच संबंधों में लागू होते हैं, जिन्हें कानूनी तौर पर अंतरराष्ट्रीय अभिकर्ताओं के रूप में मान्यता दी जाती है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों का मुख्य स्रोत अंतरराष्ट्रीय संधियां और परम्पराएं होती हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्व 

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के महत्व में अभिवृद्वि हुयी है। राष्ट्र-राज्यों ने अपने राजनीतिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक हितों को पूर्ण करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सहारा लिया है ताकि राष्ट्र राज्यों के बीच इन संबंधों में एक व्यवस्था या अनुशासन कायम की जा सके। अंतरराष्ट्रीय कानून राष्ट्रों के बीच संबंधों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि सभ्य राष्ट्रों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपने सम्मान और उनके पालन से संबंधित प्रावधानों को अपने देश के संविधान में भी स्थान प्रदान किया है। 

अंतरराष्ट्रीय कानून राष्ट्र-राज्य के लिए एक ढाल के रूप में कार्य करता है, जिसके आधार पर वे अपने अधिकारों की वकालत करते हैं और अन्य राष्ट्रों की नीतियांे की आलोचना के लिए भी एक कानूनी हथियार के रूप में प्रयुक्त करते हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में राष्ट्रों के मध्य वास्तविक संबंधों का संचालन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के आधार पर होता है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मलेनांे का आयोजन भी अंतरराष्ट्रीय व्यवहार के नियमों के आधार पर ही किया जाता है और यहाँ तक की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना या सदस्यता के नियम अंतरराष्ट्रीय कानूनों के नियम द्वारा शासित होते हैं।

दो राष्ट्रों के मध्य वार्ता के संचालन में राष्ट्र हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मान्यता देते हैं। यहाँ तक की युद्ध के दौरान भी इसका प्रयोग राष्ट्रों द्वारा किया जाता है, ताकि अपने पक्ष का औचित्य अंतरराष्ट्रीय समाज के समक्ष रखा जा सके। इसके साथ ही विश्व जनमत के रूप में अंतरराष्ट्रीय समाज का दबाव भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन के लिए एक आधार प्रदान करता है। वर्तमान में जैविक, रासायनिक व परमाणु हथियार जैसे विनाशकारी अस्त्र-शस्त्रों के विकास ने विश्व व्यवस्था के लिए निश्चित रूप से खतरा उत्पन्न कर दिया है जिसकी वजह से अनियंत्रित शक्ति पर अंकुश रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भय होना जरूरी हो गया है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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