गुणवत्ता का आशय, परिभाषा एवं विशेषताएँ

गुणवत्ता

गुणवत्ता का आशय किसी वस्तु के गुणों को कोई कितना महत्व देता है, से है । प्रत्येक वस्तु की उपयोगिता एवं उत्तमता अलग-अलग होती है ओर प्रत्येक व्यक्ति गुणवत्ता का उल्लेख भी अपने ढंग से करता है । जैसे-‘चावल’ । आमतौर पर कई गुणों से युक्त होने के कारण इसे लोग गुणकारी कहेंगे परन्तु, यह कहना कि सफेद, पतला, लम्बा दाने वाला चावल ही थोड़े मोटे एवं लाल चावल की तुलना में उत्तम है तो यह विवादित होगा क्योंकि, अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा इन दोनों किस्म के चावल की खूबियाँ (गुण/मूल्य/अंसनम) अलग-अलग से बताई जाती रही है । हाँ, यदि ऐसा होता कि सभी/अधिकतर व्यक्ति उचित तर्क एवं कारण आधार पर सफेद/पतले दाने वाले चावल को ही अधिक अच्छा कहें तो यह कहना ही पड़ता कि लाल/मोटे की अपेक्षा सफेद, पतले दाने वाले चावल की गुणवत्ता ज्यादा अच्छी है । इस प्रकार से ‘‘किसी वस्तु को कोई कितना महत्व देता है यह उस वस्तु की गुणवत्ता मानी जाती है ।’’ 

स ‘‘गुणवत्ता एक आवश्यक तथा विभेदीकरण का गुण है जो किसी वस्तु की व्यक्ति द्वारा आकलन किया जाता हैं 

स ‘‘गुणवत्ता किसी वस्तु की किसी व्यक्ति द्वारा जो उसकी विशेषता की अभिव्यक्ति करता है, उसे उस वस्तु की गुणवत्ता कहते हैं । प्रत्येक वस्तु तथा व्यक्ति की अपनी गुणवत्ता होती है, जो उस वस्तु की माँग पर निर्भर होती है ।’’ 

गुणवत्ता की विशेषताएँ

  1. गुणवत्ता एक विशेषता तथा प्रक्रिया हैं ।
  2. गुणवत्ता व्यक्तिनिष्ठा तथा वस्तुनिष्ठा दोनों प्रकार की होती है । गुणवत्ता से विषमताओं को कम करते हैं ।
  3. गुणवत्ता किसी वस्तु तथा प्रक्रिया की उत्तमता तथा उपयोगिता मानी जाती हैं ।
  4. गुणवत्ता किसी वस्तु की अंश या अनुस्थिति सापेक्ष होती हैं । इसका आकलन व्यक्तिनिष्ठ अधिक होता है ।
  5. किसी व्यक्ति द्वारा किसी वस्तु का जो महत्व आका जाता है उसे उस वस्तु की गुणवत्ता कहा जाता हैं । 
  6. यह एक अवश्य तथा विभेदीकरण की विशेषता है जो किसी व्यक्ति द्वारा किस वस्तु के लिए प्रयुक्त की जाती हैं ।
  7. गुणवत्ता एक विशेषता है जो किसी व्यत्तिफ द्वारा किसी वस्तु के लिए अभिव्यत्तिफ की जाती हैं । यह वस्तु के प्रति अभिव्यत्तिफ मात्रा है, जो व्यत्तिफ की आवश्यकता पर निर्भर होती है ।
  8. गुणवत्ता एक विशेषता के साथ एक विकास की सतत् प्रक्रिया है जिसमें रचना की जाती है और लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता हैं ।
  9. गुणवत्ता में वस्तु की आन्तरिक तथा बाह्म विशेषताओं को सम्मिलित किया जाता हैं । वस्तु की उपयोगिता प्रमुख होती हैं ।
  10. किसी वस्तु की सामान्यतः दो विशेषताएँ होती हैं- एक गुणवत्ता तथा दूसरी मात्रा यह दोनों विशेषतायें वस्तु की उपयोगिता का निर्धारण करती है । उपयोगिता भी विशेषताओं पर आधारित होती है । इन विशेषताओं का ट्टणात्मक सह-सम्बन्ध् होता हैं ।
  11. गुणवत्ता एक विशेषता, एक प्रक्रिया तथा एक प्रणाली है । इसका सीध सम्बन्ध गुणवत्ता की प्रक्रिया के उत्पादन से होता है ।
  12. गुणवत्ता के अनुरक्षण हेतु प्रणाली में सुधर की आवश्यकता होती है ।
  13. गुणवत्ता मानव की श्रेष्ठता की अभिव्यक्ति हैं ।
  14. गुणवत्ता का तात्पर्य सही कार्य की सही ढंग, सही दिशा, सही उत्पादन में करने से होता है ।
  15. किसी वस्तु, व्यत्तिफ, प्रक्रिया तथा कार्यो की विशेषताओं को भी गुणवत्ता कहते है। ।

गुणवत्ता के प्रकार

गुणवत्ता की परिभाषाओं तथा मूल्यांकन के आधार पर इसका विभाजन दो वर्गो में किया गया हैं - 

1. व्यक्तिनिष्ठ गुणवत्ता : किसी व्यक्ति द्वारा किसी वस्तु के महत्व एवं उपयोगिता का आकलन अपने ढंग से करते हैं । वस्तु की प्रक्रिया के उत्पादन का मूल्यांकन वस्तुनिष्ठ तथा व्यक्तिगत रूप में ही किया जाता है । एक ही पाठ्यवस्तु किसी छात्रा की सरल और अन्य को कठिन लगती है परन्तु पाठ्यवस्तु का सीखने की प्रक्रिया वस्तुनिष्ठ होती है ।

2. वस्तुनिष्ठ गुणवत्ता : यह गुणवत्ता उस वस्तु की उपयोगिता से सम्बन्धित है जिसे प्रक्रिया द्वारा उत्पादन किया या उसकी रचना की गई है । इसका मानदण्ड पूर्व निर्धारित होता है जो उसका अन्तिम लक्ष्य होता है । जैसे अध्यापक शिक्षा के कार्यक्रमों द्वारा शिक्षक वृत्तिका आचार संहिता और शिक्षणशास्त्राीय तत्वों क विकास करता है । इन गुणों के विकास का मूल्यांकन तथा प्रशिक्षण वस्तुनिष्ठ रूप में किया जा सकता हैं ।

इस प्रकार गुणवत्ता उत्पादन सेवाओं की एक प्रणाली है, जिसमें अभिसूचनायें, लक्ष्य, आवश्यकताओं, विषमताओं की शिक्षा की उपलब्धियों द्वारा पूर्ति की जाती है । शिक्षा द्वारा उत्पादन होता है । वह वस्तुनिष्ठ तथा व्यक्तिनिष्ठ दोनों प्रकार का होता हैं । शिक्षा की गुणवत्ता के मानदण्डों में अधिक विषमता होती है । इसे सुनिश्चित करना सम्भव नहीं है ।

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