उन्नाव का संक्षिप्त परिचय

उन्नाव का संक्षिप्त परिचय

1. स्थिति : जनपद-उन्नाव उत्तरी-पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित हैं । यह 26 अंश 7 मिनट 30 सेकेण्ड (26° 7 30 ) उत्तरी अक्षांश से लेकर 27 अंश 1 मिनट 30 सेकेण्ड (27° 2' 30 " ) उत्तरी अक्षांश के मध्य तथा 80 अंश 3 मिनट (80° 3') पूर्वी देशान्तर से लेकर 81 अंश 4 मिनट (81° 4' ) पूर्वी देशानतर के मध्य स्थित है।

2. सीमाः जनपद उन्नाव के उत्तर पूर्व में जनपद लखनऊ, दक्षिण पश्चिम में गंगा नदी तथा जनपद कानपुर एवं फतेहपुर, दक्षिण पूर्व में जनपद रायबरेली तथा पश्चिम उत्तर दिशा में जनपद हरदोई स्थित है

3. विस्तार : जनपद उन्नाव की दक्षिण पूर्व से पश्चिम उत्तर अधिकतम लम्बाई लगभग 107 कि० मी० तथा उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम अधिकतम चौड़ाई लगभग 50 मि०मी० है । इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 4558 वर्ग कि०मी० है ।

4. जलवायु तथा तापमान : जनपद की जलवायु मानसूनी जलवायु हैं क्योंकि यहाँ वर्ष भर मानसूनी जलवायु चलती है। जनपद का न्यूनतम तापमान 5 सेण्टीग्रेड तथा अधिकतम तापमान 46 सेण्टीग्रेड रहता है । वार्षिक वर्षा 100 से 200 से०मी० के मध्य रहती है। मुख्य रूप से ग्रीष्म, वर्षा तथा शीत ऋतुयें हैं।

5. नदियाँ व झील : जनपद की प्रमुख नदी गंगा है। यह जनपद की दक्षिणी सीमा पर बहती सई नदी जनपद के उत्तरी भाग में पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। हरदोई जनपद के झाबर से निकलकर कल्याणी नदी परियर नामक स्थान पर गंगा नदी से मिलती है। टेनई (भदनी) नदी, मौराही नदी, लोन नदी तथा खरही नदी जनपद की अन्य उल्लेखनीय नदियां है। जनपद में बसहा, महानय, बरकोता, सूर्यकुण्ड, मेलराम कुँअर, कुड़ासमुन्दर, खजुरिआ, जलेसर, बकनई सरवन तथा सिघवाताल नामक झीलों में वर्षा का पानी वर्ष भर रहता है।

6. कृषि व सिंचाई के साधन : जनपद निवासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है। जनपद का कुल क्षेत्रफल 458519 हे0 है जिसमें से 287385 हे० भूमि पर खेती होती है। शेष भूमि जंगल, ऊसर, चारागाह, उद्यान, आबादी एवम् जलाशयों में प्रयुक्त है। खरीफ, रबी जायद मुख्य फसल चक्र है । कच्चे व पक्के, कुयें, नलकूप, तालाब व झीलें नहरे प्रमुख सिंचाई के स्रोत है। जनपद की प्रमुख नहर 'शारदा नहर' है।

7. खनिज सम्पदा : जनपद में पदार्थों का अभाव है किन्तु कंकड़, दोमट मिट्टी, बालू विभिन्न प्रकार से घरेलू उपयोग में लाये जाते है। जल, वायु और सौर ऊर्जा के अतिरिक्त अन्य कोई ऊर्जा साधन उपलब्ध नहीं है। लकड़ी को ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा के स्रोत के रूप में प्रयोग किया जाता है।

8. उद्योग धन्धे एवम् व्यापार : कृषि जनपद का प्रमुख व्यवसाय है । झाडू, पंखे, चटाइयां, सरकण्डे की रस्सी, सनई की रस्सी व पलंग, गुड़ व खाण्डसारी डलिया निमार्ण प्रमुख कुटीर उद्योग हैं। इसके अलावा बबूल की छाल से चमड़ा रंगाई, घरेलू उपयोग का साबुन, लिखने की स्याही, फर्नीचर व कपड़ों की छपाई जैसे कार्य भी किये जाते हैं । कपड़ा बुनाई, छपाई, मिट्टी के बर्तन, ईट भट्टा, मत्स्य पालन आदि कुटीर उद्योग भी जनपद में हैं। भारी उद्योगों में खाद्य उद्योग, सरिया उद्योग, चमड़ा उद्योग, शराब मिल, काँच उद्योग, चीनी मिट्टी उद्योग, शीत गृह, कपड़ा मिल, केमिकल उद्योग, दफ्ती उद्योग, कृषि उपकरण उद्योग, खाद्य तेल उद्योग, तम्बाकू व इत्र उद्योग तथा उर्वरक उद्योग से सम्बन्धित छोटे बड़े कई कारखाने जनपद में चल रहें हैं ।

9. यातायात व संचार व्यवस्था : पारंपरिक यातायात व संचार माध्यमों के अलावा जनपद से राष्ट्रीय राजमार्ग तथा भारत के प्रमुख नगरों को जोड़नें वाली रेल सेवायें उपलब्ध है। जनपद की नदियों से नावों द्वारा यातायात होता है। जनपद में 241 ग्रामीण डाकघर, 23 नगरीय डाकघर तथा 29 तार केन्द्र हैं। अत्याधुनिक बी०एस०एन०एल०, एस्सार व रिलायन्स की मोबाइल फोन सुविधायें भी प्रमुख कस्बों में उपलब्ध हैं । उन्नाव जनपद का नामकरण महाराजा उनवन्त राय के नाम पर हुआ है। यह नगर उनकी राजधानी था।

10. प्रमुख पर्यटन स्थल : नवाबगंज स्थित प्रियदर्शनी पंक्षी बिहार एक प्रमुख पर्यटल स्थल है। जानकी कुड परियर, संचान कोट, परसंदन, बदरका व बक्सर जैसे स्थान अपनी ऐतिहासिकता के कारण दर्शनीय है ।

11. शासन प्रशासन : जनपद में पांच तहसीलों उन्नाव, सफीपुर, हसनगंज, पुरवा, बीघापुर, के नाम से बांटा गया है तथा इन्हें 22 परगनों में विभक्त किया गया है। कुल 1795 राजस्व ग्राम है। जनपद में कुल 18 थानें हैं। उन्नाव जनपद में उन्नाव, शुक्लागंज व बांगरमऊ कुल तीन नगर पालिका सहित, 15 नगर क्षेत्र ( टाउन एरिया) स्थित है।

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