विज्ञापन के माध्यम, कार्य, उद्देश्य, लाभ, हानियां

विज्ञापन के माध्यम

ग्राहकों को आकर्षित करने और अपनी बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से देते हैं। ये सभी प्रवर्तन की क्रियाएं ‘विज्ञापन’ कहलाती हैं और इन क्रियाओं को अपनाने वाले सभी विनिर्माता, व्यापारी अथवा सेवाएं प्रदान करने वाले ‘विज्ञापन दाता’ अथवा ‘प्रायोजक’ कहलाते हैं।

विज्ञापन के माध्यम

विज्ञापन के माध्यम vigyapan ke madhyam जिनके द्वारा ये सूचनाएं प्रदान की जाती हैं, जैसे समाचार-पत्र, पत्रिकाएं, रेडियो, टेलीविजन आदि, विज्ञापन माध्यम कहलाते हैं।
  1. समाचार पत्र
  2. पत्रिकाएँ
  3. रेडियो 
  4. टेलीविजन
  5. इंटरनेट
  6. होर्डिंग 
  7. पोस्टर 

समाचार पत्र

आप समाचार पत्र तो अवश्य पढ़ते होंगे। हमारे देश में समाचार पत्र हिन्दी, अंग्रेजी तथा अन्य प्रांतीय भाषाओं में प्रकाशित किए जाते हैं। ये ताजा घटनाओं, समाचारों तथा लोगों के विचार जानने का अच्छा स्रोत होते हैं। इसके साथ ही समाचार पत्र विज्ञापन का भी एक आम माध्यम है। समाचार पत्र के माध्यम से विज्ञापनकर्ता संदेश को संप्रेषित करते हैं तथा यह करोड़ों लोगों तक पहुंचता है।

पत्रिकाएँ

पत्रिकाएं नियमित रूप से प्रकाशित होती हैं, लेकिन दैनिक आधर पर इनका प्रकाशन नहीं किया जाता। इनका प्रकाशन साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, द्वैमासिक, त्रैमासिक, यहां तक कि वार्षिक आधार पर किया जाता है। उदाहरण के लिए आपने इंडिया टुडे, आउट लुक, योजना, स्वागत, गृह शोभा, नंदन, चंपक आदि पत्रिकाएं देखी होगीं जिनका हिन्दी में नियमित प्रकाशन होता है। इन पत्रिकाओं का प्रकाशन अधिक संख्या में किया जाता है, इस प्रकार इनमें छपने वाले विज्ञापन भी अधिक संख्या में लोगों के पास पहुंचते हैं।

रेडियो

हम सभी रेडियो से परिचित हैं और इस पर विभिन्न वस्तुओं के विज्ञापन भी सुनते रहते हैं। रेडियो पर कार्यक्रम के प्रसारण के दौरान बीच-बीच में छोटे-छोटे अंतराल लिए जाते हैं, जिन्हें वस्तुओं तथा सेवाओं के विज्ञापनों द्वारा भरा जाता है। इसके अलावा लोकप्रिय कार्यक्रमों को विज्ञापनदाताओं द्वारा प्रायोजित भी किया जाता है तथा इन कार्यक्रमों के दौरान नियमित अंतराल पर विज्ञापन दिये जाते हैं।

टेलीविजन

सूचना तकनीक और इलैक्ट्रॉनिक माध्यमों के तेजी से हो रहे प्रसार के कारण आज टेलीविजन विज्ञापन सबसे आगे है। टेलीविजन हमारी आंखों और कानों दोनों पर प्रभाव छोड़ते हैं। टेलीविजन पर उत्पादों को दिखाया जा सकता है। उनके प्रयोग को दिखाया जा सकता है, उनकी उपयोगिता को प्रदर्शित किया जा सकता है और उपयोगिता के बारे में बताया जा सकता है। 

रेडियो की तरह ही टेलीविजन पर भी विज्ञापन कार्यक्रमों के बीच में अंतरालों में दिखाए जाते हैं और विज्ञापनदाता द्वारा इनका प्रायोजन किया जाता है।

इंटरनेट

क्या आप इंटरनेट से परिचित हैं? वास्तव में यह सूचनाओं को इकट्ठा करने और संप्रेषण का आध्ुनिकतम माध्यम है, यदि आपके पास कम्प्यूटर है ओर उसमें इंटरनेट की सुविध है तो आप पलक झपकते दुनियाभर की सूचनाएँ इससे प्राप्त कर सकते हैं। इंटरनेट के माध्यम से आप किसी भी विनिर्माता अथवा सेवा प्रदान करने वाले की वेबसाइट पर जाते हैं और सभी सूचनाएं प्राप्त कर लेते हैं। 

यदि कभी आपको किसी वेबसाइट का पता नहीं है तो इंटरनेट के सर्च इंजन या पोर्टल द्वारा उसका पता प्राप्त कर लेते हैं। 

सभी वेब साइटों अथवा पोर्टल पर भी विभिन्न विनिर्माताओं अथवा सेवा प्रदान करने वालों द्वारा विज्ञापन दिए जाते हैं।

होर्डिंग

सड़क पर चलते-पिफरते आपने छतों के ऊपर मोटे-मोटे लोहे के खंभों पर या दीवारों पर लगे होर्डिंग देखे होंगे। ये आमतौर पर एक प्रकार के बोर्ड होते हैं जिन पर पेंट करके या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से डिजाइन करके विज्ञापन तैयार किए जाते हैं ओर उन्हें रात में या दिन में आसानी से देखा जा सकता है।ये होर्डिंग जिन स्थानों पर लगाए जाते हैं उन स्थानों के लिए विज्ञापन दाता को भुगतान करना पड़ता है।

पोस्टर 

पोस्टरों को छापकर दीवारों, भवनों, पुलों आदि पर लगाया जाता है, ताकि इन्हें देखकर उपभोक्ता आकर्षित हों। हमारे देश में सिनेमा घरों तथा सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाने का प्रचलन आम है।

विज्ञापन के कार्य

  1. संभावित ग्राहकों के वस्तुएँ खरीदने हेतु प्रेरित करना।
  2. ग्राहकों को वस्तुओं तथा उनके निर्माताओं के संबंध में जानकारी देना। 
  3. जनता की रुचि जाग्रत करना तथा उसकी मांग में वृद्धि करना।
  4. वस्तुओं की मांग को बनाए रखना। 
  5. वस्तुओं के प्रति ग्राहकों में विश्वास उत्पन्न कराना। 
  6. वस्तुओं के उपयोग के ढंग के बारे में ग्राहकों को जानकारी देना।

विज्ञापन के उद्देश्य

  1. वस्तुुओं के बारे में जानकारी देना - विज्ञापन का प्रमुख उद्देश्य निर्मित वस्तुओं के संबंध में अधिक से अधिक लोगों को जानकारी देना है जब तक वस्तुओं के बारे में सामान्य जनता को जानकारी नहीं होगी, तब तक उसकी इच्छा उसे खरीदने की नहीं होगी, तब तक वस्तुओं का विक्रय होना असंभव है।
  2. मांग उत्पन्न करना -विज्ञापन का दूसरा उद्देश्य बाजार में वस्तु की मांग उत्पन्न करना है बाजार में वस्तु की मांग तभी पैदा होती है, जब उपभोक्ताओं के समक्ष वस्तु का बार-बार विज्ञापन एवं प्रचार किया जाता है, जिससे जनता में उसे क्रय करने की इच्छा जागृत होती है फलस्वरूप उसकी मांग होने लगती है
  3. मांग में वृद्धि करना - मांग उत्पन्न करने के साथ-साथ विज्ञापन का यह भी उद्देश्य है, कि नए-नए ग्राहकों को खोजकर वस्तु की मांग में वृद्धि करना भी है यह कार्य विज्ञापन के विविध साधनों के प्रयोगों द्वारा किया जाता सकता है।
  4. ख्याति में वृद्धि करना - विज्ञापन के द्वारा वस्तु के साथ-साथ व्यवसाय की साख में भी वृद्धि होती है निरन्तर विज्ञापन करने से उत्पादन करने वाली संस्था के प्रति जनता में विश्वास जागृत होता है
  5. मांग को स्थिर बनाए रखना - निर्माता विज्ञापन के द्वारा वस्तुओं की मांग को स्थिर बना रखने के लिए प्रयोग करता है विज्ञापन केवल वस्तु का प्रचार ही नहीं करता, अपितु जनता में उत्पन्न भ्रांतियों को दूर करता है और वस्तु के गुणों का विज्ञापन द्वारा प्रचार करता है विज्ञापन के द्वारा मूल्य उपयोगिता एवं उपयोग की विधि संबंधी जानकारी दी जाती है इससे जनता में विश्वास पैदा होता है और वस्तुओं की मांग निरन्तर बनी रहती है।
  6. नए प्रयोगों की जानकारी देना - विज्ञापन का उद्देश्य वस्तुओं के नए-नए प्रयोग तथा प्रयोग की विधियों की पर्याप्त जानकारी देना भी है, ताकि क्रेता पूरा-पूरा लाभ उठा सके।
  7. परिवर्तनों के बारे में जानकारी देना - विज्ञापन का महत्वपूर्ण उद्देश्य संस्था की नीतियॉं, वस्तुओं की किस्म, बनावट, मूल्य आदि मे परिवर्तन की सूचना देना भी होता हैं।

विज्ञापन के लाभ

  1. बिक्री में वृद्धि - वर्तमान युग विज्ञापन का युग कहलाता हैं कोई भी व्यवसायी चाहे छोटा हो या बड़ा विज्ञापन के बिना सफलता प्राप्त नहीं कर सकता वर्तमान में विज्ञापन को आधुनिक श्रंृगारमय एवं आकर्षक तरीकों से किया जाता है इन विज्ञापनों से ग्राहक प्रभावित होते है। और इस प्रकार बिक्री में वृद्धि होती है बिक्री में वृद्धि होने से विक्रेता के लाभ में वृद्धि होती है।
  2. रोजगार में वृद्धि - रोजगार के दृष्टिकोण से भी विज्ञापन अत्यन्त महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकांश व्यक्ति विज्ञापन संबंधी कार्यो में ही संलग्न रहते हैं इससे ही उनका जीवन निर्वाह होता है विज्ञापन कार्य के लिए कई प्रकार के व्यक्तियों की आवश्यकता होती है जैसे- लेखक, कलाकार, विशेषज्ञ आदि आजकल तो कई व्यावसायिक संस्थाएं ऐसी खुल गई है।, जिनका कार्य केवल विज्ञापन करना है।
  3. लागत व्यय में कमी - आज के प्रतियोगी बाजार में वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि करके अधिक लाभ कमाना संभव नहीं है इसके विपरीत वह विज्ञापन द्वारा वस्तुओं की मांग में वृद्धि करके उन्हें अधिक मात्रा में उत्पादन करके उनकी लागत में कमी करने का प्रयास करता है अधिक मात्रा में किसी वस्तु का उत्पादन लागत में कमी करने यह निश्चित है कि उस वस्तु का उत्पादन मूल्य कम हो जाता है इस प्रकार विज्ञापन एवं कुशल प्रबंध द्वारा वस्तुओं का विक्रय मूल्य घटाया जात सकता है मूल्य कम होने से वस्तुओं की बिक्री अधिक होती है इससे विक्रेता और ग्राहक दोनों लाभान्वित होते है।
  4. विक्रेताओं को प्रोत्साहन - विज्ञापन के द्वारा विक्रेताओं का कार्य बहुत आसान हो जाता है अब विक्रेता को वस्तु के मूल्य, गुण एवं प्रयोग के बारे में समझाने की अधिक आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह कार्य विज्ञापन द्वारा हो जाता है अब तो उन्हें केवल आदेश प्राप्त करने का कार्य ही शेष रह जाता है इससे स्पष्ट है कि विज्ञापन के द्वारा विक्रेताओं को बहुत प्रोत्साहन मिलता है।
  5. वस्तुओं के लिए स्थायी मॉंग - विज्ञापन एक ऐसा साधन है, जिसके द्वारा किसी वस्तु की मॉंग को स्थाई रखा जा सकता है उदाहरण के लिए हम बाटा के जूतों को लेते हैं, समाचार पत्रों मे इस प्रकार का विज्ञापन निकाला जाता हैं कि’’बाटा के जूते पहनिये, यह गर्मियों में ठण्डे और सर्दियों में गर्म रहते हैं’’ अधिकांश व्यक्ति इन विज्ञापनों से प्रभावित होकर वर्षभर बाटा के जूते पहनने लगते हैं इससे जूतो की मॉंग भी स्थायी बन जाती है।

विज्ञापन की हानियां

विज्ञापन की हानियों या दोषों को  विभक्त किया जा सकता है-
  1. धन का अपव्यय - विज्ञापन के कारण कई उपभोक्ता उन वस्तुओं को भी खरीद लेते हैं जो कि उनके लिए आवश्यक नहीं होती हैं इस प्रकार उनका सीमित धन अनावश्यक वस्तुओं पर खर्च हो जाता है ऐसा करने से धन का अपव्यय होता हैं।
  2. मिथ्या विज्ञापन - विज्ञापन एक उग्र विद्या बन गई है। क्योंकि इसके द्वारा बहुत-सी मिथ्या बातों का प्रचार किया जाता है, जैसे- ‘‘आज ही सौ रुपये भेजकर एक घडी़ व रेडियो प्राप्त करें’’ आदि जनता इस प्रकार विज्ञापनों से प्रभावित होकर हानि उठाती है, क्योंकि इसमें सत्यता का अभाव होता है हमारे देश में इस प्रकार के विज्ञापन बहुत देखने को मिलते है।
  3. फैशन में परिवर्तन - विज्ञापन के द्वारा फैशन में बहुत परिवर्तन आता है इस कारण विक्रेता और उपभोक्ता दोनों को हानि होती है विक्रेता के पास जो पुराने फैशन का माल रखा है, वह बेकार हो जाता है, क्योंकि फैशन में परिवर्तन के कारण उपभोक्ता उसे नहीं खरीदते उपभोक्ता के दृष्टिकोण से भी यह हानिप्रद इसलिए है कि फैशन में परिवर्तन होने के कारण उन्हें अपनी पुरानी वस्तुओं में भी कुछ परिवर्तन करवाने के लिए व्यय करना पड़ता है।
  4. प्रतिस्पर्धा को जन्म - विज्ञापन से प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में विस्तार होता है, जिससे निर्माताओं को वस्तुओं के मूल्य में अनायास कमी करनी पड़ती है इस प्रकार वस्तुओं के मूल्य की कमी की पूर्ति उनकी गुणवत्ता घटाकर की जाती है।
  5. सामाजिक बुराइयों में वृद्धि - जो विज्ञापन आरामदायक और विलासिता संबंधी वस्तुओं के संबंध में किया जाता है उसके कई सामाजिक दुष्परिणाम निकलते हैं जब किसी व्यक्ति को किसी एक विशेष चीज के उपभोग की आदत पड़ जाती है, तो उसका छूटना बहुत कठिन हो जाता है अत: विज्ञापनों से सामाजिक बुराइयों में वृद्धि होती है।
  6. स्वच्छता में कमी - विज्ञापन प्राय: दीवारों पर लिखकर या पोस्टर चिपकाकर किया जाता है इसमें चारों ओर गंदगी बढ़ जाती है तथा मकानों की दीवारों व सड़कें आदि गंदी दिखाई देने लगती है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं। मैंने अपनी पुस्तकों के साथ बहुत समय बिताता हूँ। इससे https://www.scotbuzz.org और ब्लॉग की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

2 Comments

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