राज्य और सरकार

अनुक्रम
जैसा कि आप जानते हैं कि सरकार राज्य का एक घटक है। यह वह संस्था है जहां पर कानून बनाये और लागू किये जाते हैं और उन नियमों का उल्लंघन करने वालों को दण्ड मिलता है। यही राज्य का प्रत्यक्ष रूप है। इसमें राज्य के सभी लोग, संगठन और संस्थाएँ शामिल हैं जिनके द्वारा राज्य की इच्छा व्यक्त की जाती है और उसका प्रतिपादन भी होता है। यद्यपि राज्य अपनी सरकार के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करता है फिर भी दोनों में अंतर स्पष्ट करना आवश्यक है।

क. राज्य के पास इसके स्वाभाविक अधिकार है जबकि सरकार के पास नहीं। सरकार को यह शक्ति राज्य के अधिकारों, शक्तियों और संविधान द्वारा प्राप्त होती है।

मौलिक नियमों के संग्रह के रूप में संविधान वह मौलिक कानून है जिसके द्वारा किसी राज्य की सरकार सुसंगठित होती है। 

अन्य संगठनों और राज्य में प्रभुसत्ता का अंतर है क्योंकि अन्य संस्थाएँ संप्रभु नहीं है जबकि राज्य संप्रभु होता है। अन्य संगठन पूर्ण स्वायत हो सकते हैं, और सदैव होते भी है परंतु उन्हें राज्य के नियमानुसार कार्य करना होता है। राज्य सभी संघों में सर्वशक्तिमान होता है और किसी अन्य राज्य से स्वतंत्र।

छ. राज्य के कानूनों का उल्लंघन करने पर सजा होती है जैसे कि जेल। अन्य किसी संगठन को किसी को भी शारीरिक दंड देने का अधिकार प्राप्त नहीं है। वे किसी को संगठन से केवल बाहर निकाल सकते हैं। इस प्रकार से राज्य तथा अन्य संघ के बीच संबंध महत्वपूर्ण है। अन्य संगठन राज्य के उत्तरदायित्वों को कम करते हैं, व े राज्य से भी अच्छा कार्य करते है, उनमें स े कुछ तो जैसे कि परिवार, मित्र समूह, चर्च आदि राज्य के अस्तित्व से भी पहले के हैं। राज्य के अस्तित्व से भी पहले के हैं। राज्य उनकी शक्तियों को कम नहीं करता तथा उन पर प्रभुत्व नहीं दिखाता। सबसे अच्छा कार्य जो राज्य इस क्षेत्र में कर सकता है वह यह है कि वह इसकी क्रियाओं का ठीक से निरीक्षण करें, उनमें योगदान दें। ठीक इसी प्रकार अन्य संगठनों को भी अपने क्षेत्र और क्रियाओं को राज्य नियमों के दायरे से बाहर होकर उन्हें चुनौती नहीं देनी चाहिए। राज्य को भी अन्य संगठनों की पूर्णस्वायत्ता का भरोसा दिलाना चाहिए।

ख. राज्य एक बड़ी इकार्इ है जिसमें इसके सभी नागरिक शामिल होते है; सरकार एक छोटी इकार्इ है जिसमें सरकार को सचारू रूप से चलाने वाले कर्मचारी होते हैं। हम सभी राज्य के नागरिक तो होते हैं परंतु सरकार के सदस्य नहीं होते।

गार्नर लिखते है:- ‘‘सरकार राज्य का आवश्यक अंग है परंतु राज्य से बड़ी नहीं, वैसे ही जैसे किसी निगम का निर्देश समूह ही स्वयं निगम नहीं है।’’
  1. राज्य अमूर्त है। सरकार इस परिकल्पना का मूर्त रूप है। हम सरकार को देखते हैं परंतु राज्य को नहीं। 
  2. राज्य लगभग एक स्थायी संस्था है; ऐसा इसलिए है क्योंकि यह तब तक कायम रहता है जब तक कि इस पर आक्रमण करके इसे किसी अन्य राज्य का हिस्सा न बना लिया जाए। सरकार अस्थायी होती है क्योंकि यह बदलती रहती है; आज जो शासक हैं वे कल शासकी नहीं भी हो सकते। अन्य प्रकार से देखने पर राज्य सभी जगह एक जैसा हो सकता है परंतु सरकार का रूप एक से दूसरे राज्य में बदल सकता है। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस राज्य है। भारत और ग्रेट ब्रिटेन में जहाँ संसदीय सरकार है, वहीं अमेरिका में अध्यक्षीय सरकार है। 
संसदीय सरकार वह सरकार है जहां सरकार का विधायी अंग इसकी कार्यकारिणी अंग से घनिष्ठता से जुड़ा होता है; मंत्रिमण्डल इसी विधायी से लिया जाता है जिसके प्रति वह उत्तरदायी होता है मुख्यत: संसद क े निचले सदन के प्िर त। अध्यक्षीय सरकार वह सरकार है जहां सरकार का कार्यकारिणी अंग विधायी अंग से स्वतंत्र होता है; कार्यकारिणी का अलग अस्तित्व होता है और वह मंत्रिमण्डल के प्रति उत्तरदायी नहीं होता।
  1. संप्रभु शक्ति राज्य के पास होती है। सरकार केवल शक्तियों का प्रयोग करती है। राज्य की शक्तियाँ वास्तविक और मौलिक होती है। 
  2. राज्य का विरोध करना सरकार के विरोध करने से अलग है। हम सरकार की आलोचना करते हैं न कि राज्य की। राज्य की आलोचना विद्रोह है; सरकार की आलेचना विद्रोह नहीं है। हम किसी भारतीय से कभी नहीं सुनते कि भारत खराब है बल्कि अक्सर यह सुनने में आता है कि किसी राजनीतिक दल या गठबंधन की अनुवार्इ वाली सरकार की नीतियाँ खराब है। राज्य की निंदा एक अपराध है। यह एक कर्तव्य है बल्कि अधिकार है कि कोर्इ अपनी सरकार की आलोचना कर सकता है। 
  3. सरकार राज्य का केवल एक घटक है। यह संपूर्ण (राज्य) का एक भाग है। भाग होने के कारण यह राज्य से बड़ी नहीं हो सकती। जब हम राज्य की बात करते हैं, तो हम जनसंख्या, भू-भाग, सरकार और संप्रभुता की बात करते है, परंतु जब हम सरकार की बात करते है, तो हम एक अंग की बात करते है, राज्य का एक मात्र घटक। 
  4. राज्य का क्षेत्र सदैव निश्चित होता है। यह बदलता नहीं है। सरकार का क्षेत्र कभी भी स्थायी नहीं होता। मुहम्मद तुगलक ने अपनी राजधानी बदलकर दौलताबाद कर दी थी। बहुत सी सरकारों ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जर्मनी के आक्रमण के डर के कारण अपनी राजधानी लंदन बना ली थी।

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