13वें वित्त आयोग की सिफारिशें

13वें वित्त आयोग की स्थापना(Establishment of 13th Finance Commission)-

इसमें हम 13वें वित्त आयोग की स्थापना , उद्देश्य एवं कार्यों का अवलोकन करने के साथ ही 13वें वित्त वित्त आयोग विचारार्थ विषय को विस्तृत रूप से जानेंगे। इसके पश्चात 13वें वित्त वित्त आयोग सिफारिशों को भी समझेंगे।

13वें वित्त आयोग के गठन के उद्देश्य(Objectives of formation of 13th Finance Commission)-

  1. करों का निवल प्राप्तियों का केन्द्र और राज्यों के बीच वितरण, जिन्हें संविधान के अध्याय-I भाग XII के अन्तर्गत वितरण किया जायेगा अथवा वितरित किया जा सकता है, और ऐसी प्राप्तियों के सम्बन्ध में हिस्सों का राज्यों के बीच आवन्टन, 
  2. भारत के समेकित निधि से राज्यों के राजस्व के सहायता अनुदान सम्बन्धित करने वाला सिद्धान्त और राज्यों को भुगतान किये जाने वाली राशि, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद, 275 के अन्तर्गत उनके राजस्वों के सहायता अनुदान के जरिये सम्बद्ध अनुच्छेद के खण्ड (1) उपबन्धों में विर्निदिष्ट प्रयोजनों से सहायता की आवश्यकता है। 
  3. राज्य वित्त आयोग द्वारा किये गये सिफारिशों के आधार पर राज्य में पंचायतों तथा नगर पालिकाओं से संसाधनों के बढ़ोत्तरी के लिये राज्य के समेकित तिथि को बढ़ाने हेतु वाँछित उपाय सुझाना। 

13वें वित्त वित्त आयोग के कार्य (Functions of 13th Finance Finance Commission)-

वित्त आयोग के समग्र कार्य संविधान के अनुच्छेद 270, 275 और 280 में निर्धारित उपबन्धों का निश्पादन करना है। यह उपबन्धों चालू संभावित भावी वृहत आर्थिक और राजकोषीय परिदृष्यों को ध्यान में रखते हुये संघीय वित्त के सिद्धान्तों के अनुरूप होना चाहिए। जिसमें केन्द्र-राज्यों और स्थानीय निकामों की राजकोषीय स्थिरता और पर्याप्त साधन उपयोगिता हासिल हो सकें। आयोग के मुख्य कार्यों को तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है- आयोग का प्रथम अथवा मुख्य कार्य संघ और राज्य के बीच भारत के संविधान के अध्याय-ऋ ऋ भाग ऋऋऋ के तहत उनमें विभाजित करने वाले करों के निबल आय, जिसे सामान्यत: ‘‘विभाज्य फुल’’ कहा जाता है के वितरण की सिफारिश करना है।

दूसरा कार्य ऐसी आय को राज्यों के बीच आवण्टन की सिफारिश करने का भी है। संविधान के अनुच्छेद 275 के तहत आयोग उन राज्यों को जिन्हें सहायता की आवश्यकता है, को सामान्य प्रयोजन के अनुदान कर अन्य विशिष्ट प्रयोजन के अनुदान प्रदान कर सकता है। संविधान राज्य वित्त आयोग की सिफारिश को ध्यान में रखते हुए आयोग को कहा गया है कि विभिन्न राज्यों में पंचायतों नगर पालिकाओं के संसाधनों की पूर्ति के लिये अलग-अलग राज्यों की समेकित निधियों का समर्थन कर उपामों की सिफारिश करें।

13वें वित्त वित्त आयोग विचारार्थ विषय (Terms of Reference 13th Finance Finance Commission)-

13 वें वित्त आयोग को यह कहा गया कि अपनी संस्तुति देते समय आयोग इन बातों को ध्यान में रखेगा-
  1. कर तथा गैर-कर राजस्व का स्तर जो 2008-09 के अन्त में प्राप्त होगा, उसके आधार पर 1 अप्रैल 2010 से प्रारम्भ होने वाली आगामी पाँच वर्ष के लिये केन्द्र सरकार के संसाधनों का अनुमान लगाना।
  2. कर तथा गैर-कर राजस्व का स्तर जो 2008-09 के अन्त में प्राप्त होगा, उसके आधार पर 1 अप्रैल 2010 से प्रारम्भ होने वाली आगामी पाँच वर्ष के लिये राज्य सरकार के संसाधनों का अनुमान लगाना। 
  3. राज्य तथा केन्द्रीय को ही जाने वाली बजेटरी सहायता, प्रशासन, रक्षा, आन्तरिक तथा सीमा सुरक्षा, ऋण सेवा तथा निश्चित रूप से किये जाने वाले व्यय तथा दायित्व को ध्यान में रखते हुए, केन्द्र सरकार की संसाधन सम्बन्धी माँग। 
  4. संघ तथा राज्य सरकारों की प्राप्तियों तथा व्यय को संतुलित करने के उद्देश्य ही नहीं बल्कि पूँजी निवेश के लिये आधिक्य का सृजन करना। 
  5. कर GDP अनुपात तथा कर-राज्य GDP अनुपात को बाटने का उपाय। 
  6. 1 अप्रैल 2010 से लागू होने वाले प्रस्तावित GST के प्रभाव का अध्ययन जिसमें देश के विदेशी व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन सम्मिलित है। 
  7. पोषणीय विकास के सन्दर्भ में पारिस्थितीय, पर्यावरण तथा जलवायु के प्रबन्ध की आवश्यकता। 
  8. उत्तम परिणाम की दृष्टि से सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता को उन्नत करने की आवश्यकता। अपनी संस्तुतियाँ देते समय जहाँ जरूरत होगी, वहाँ आयोग 1971 जनगणना के ही अंकों को आधार रूप लेगा। नेशनल क्लेसिगिरी आकस्मिक फण्ड, क्लेसिमिटी रिलीफ फण्ड तथा आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 के तहत फण्ड की वर्तमान वित्तीय व्यवस्था की, यदि आयोग चाहे तो समीझा करना आयोग उस आधार को स्पष्ट करेगा जिसके आधार पर उसमें संघ और राज्यों की प्राप्तियों तथा व्यय के सम्बन्ध में अनुमान लगाना। 

13वें वित्त वित्त आयोग सिफारिशें (13th Finance Finance Commission Recommendations)-

  1. FRBM के अनुसार 2009-10 केन्द्र राज्य संयुक्त ऋण जी0डी0पी0 अनुपात को 82.0 प्रतिशत तक लाना था, जबकि 12 वें वित्त आयोग ने यह लक्ष्य 75.0 प्रतिशत रखा था। 13 वें वित्त आयोग इस अनुपात को 2014-15 तक 68.0 प्रतिशत, तथा केन्द्र के सम्बन्ध में इस अनुपात को 45.0 प्रतिशत लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 
  2. राजस्व धारा- जी0डी0पी0 अनुपात को 2009-10 में प्रक्षेपित 4.8 प्रतिशत से 2014-15 राजस्व धारा को 0.5 प्रतिशत के राजस्व आधिक्य में परिवर्तित करना है। यद्यपि उसने यह संस्तुति किया कि इसे क्रमिक रूप से घटाकर 280 प्रतिशत तक लाना चाहिए। 
  3. 13 वें वित्त आयोग ने 12 वें वित्त आयोग की सीमा को बढ़ाकर 32.0 प्रतिशत कर दिया, पर 13 वें आयोग ने विक्री कर के बदले लगायी गयी अतिरिक्त उधार शुल्क के सम्बन्ध में निवल केन्द्र राजस्व में राज्यों का कोई हिस्सा देने की बात नहीं की हैं। और न ही टैम्स टाइल्स, तम्बाकू चिनी पर बिक्री या वैट लगाने की स्थिति में कर हस्तांतरण में राज्यों के हिस्सों को घटाने की बात की है जैसा कि 12 वें वित्तआयोग ने की थी। पर केंन्द्र द्वारा लगाये गये उपकर तथा अधिकार को विभाग्य योग्य संभरण में सम्मिलित किये जाने की राज्यों की माँग आयोग ने स्वीकार नहीं किया है।
  4. उल्लेखनीय है कि पहली बार 11 वें वित आयोग ने केंन्द्र से राज्यों को होने वाले सम्पूर्ण राजस्व हस्तातंरण की 37.5 प्रतिशत की उच्चतम सीमा निर्धारित की थी, जिसे 12 वें वित्तआयोग ने बढ़ाकर 38.0 प्रतिशत कर दी थी। 13 वें वित्तआयोग ने इस सीमा को बढ़ाकर 39.5 प्रतिशत कर दिया। अर्थात केंन्द्र के सफल राजस्व हस्तांतरण होगा। ऐसे राज्यों को जिनका कुल क्षेत्र के हिस्सा 21 प्रतिशत से कम है। उनके 21 प्रतिशत न्यूनतम हिस्सा देने की संस्तुति की है। यह राज्य गोवा, हरियाणा, हिमांचलप्रदेश, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा एवं उत्तराखण्ड। 12 वें वित्त आयोग द्वारा प्रमुख प्रति व्यक्ति आय दूरी कसौटी, जिसे प्रति व्यक्ति JSDP के आधार पर हैैं। 13 वें वित्त आयोग ने ‘‘कर देय क्षमता अन्तर या’’ राजकोषीय क्षमता अन्तर’’ को कसौटी के रूप में लिया है। वित्त आयोग ने 2004-2005 से 2006-07 के बीच तीन वर्षो की प्रति व्यक्ति जी0डी0पी0 के आधार पर प्रत्येक राज्य के लिए प्रति व्यक्ति JSDP ज्ञात किया है। इसके बाद कर JSDP अनुपात ज्ञात किया है। इस अनुपात को सभी राज्यों ‘‘सामान्य वर्गीय’’ तथा विशिष्ट वर्गीय राज्यों के लिए अलग-अलग व्यक्त किया है। 
  5. वित्त आयोग ने यह स्वीकार किया है कि समता तथा कुशलता के निर्देशक सिद्धान्त है, जिनका अनुपालन सभी वित्त आयोग ने क्षैतिजीय हस्तान्तरण के संबंध में किया है, और 13 वें ने भी ऐसा ही किया है। अलग-अलग वित्त आयोगो ने क्षैतिज हस्तान्तरण के सम्बनन्ध में अनेक कसौटियाँ चुनी है, तथा अलग-अलग आयोगों इन कसौटियों चुनी है, तथा अलग-अलग आयोगो ने इन कसौटियों का अलग-अलग भार प्रदान किया है। 1971 के बार के नियुक्त सभी आयोगो ने बिना रूपवार के राज्यों की 1971 की जनसंख्या को अपनी गणना का आधार बनाया हैं। जैसे निर्देश उनकी नियुक्त की शर्त में दिया गया है। सब आयोगों ने जनसंख्या को एक कसौटी के रूप में चुना है। 
  6. 13 वें वित्त आयोग ने चार अनुदानों का उल्लेख किया है:- (A) शिक्षा के सम्बन्ध में सामास्यीकरण ग्राष्ट के स्थान पर (6-14 वर्ष) के व्यापीकरण के लिये अनुदान। (B) स्वभाव सामान्यीकरण ग्राम। (C) सार्वजनिक व्ययों की गुणवत्ता सुधारने के लिये अनुदान। (D) पोशीय विकास को दृष्टिगत रखते हुए पारिस्थितिक पर्यावरण तथा जलवायु प्रबन्ध के सम्बन्ध में अनुदान।
  7. केन्द्र सरकार के विभिन्न करों की निवल प्राप्तियों में से 32 प्रतिशत प्राप्तियाँ राज्यों को जाएंगी,
  8. राजस्व खाते पर राज्यों को समय अंतरणों पर निर्दिष्टात्मक सीमा केन्द्र की सकल राजस्व प्राप्तियों के 39.5 प्रतिशत पर नियत की जाए।
  9. मध्यावधिक राजकोषीय योजना एक आशय विवरण के बजाय प्रतिबद्धता का विवरण होना चाहिए। 
  10. कर, व्यय, सरकारी निजी भागीदारी, देयताओं तथा प्राप्तियों एवं व्यय अनुमानों के अंतर्हित परिवर्तनों के व्योरों सहित बजट/एमएफटीपी के लिए नए प्रकटन विनिर्दिष्ट किए जाए। 
  11. वित्तीय विनियम एवं बजट प्रबन्ध अधिनियम में उन प्रघातों के स्वरूप को निर्दिष्ट किया जाना आवश्यक है जिनके लिए उसके तहत् लक्ष्यों में ढ़ील दिया जाना आवश्यक होगा। 
  12. ऐसी आशा की जाती है कि राज्य वर्ष 2011-12 तक अपने राजकोषीय सुधार मार्ग पर वापस आने में समर्थ हो जाएंगे इसलिए वे अपने-अपने एफआरबीएम अधिनियमों में यथानुसार संशोधन करें। 
  13. राज्य सरकारें सामान्य निश्पादन अनुदान के लिए तथा विशेष क्षेत्र निष्पादन अनुदान के उसी दशा में पात्र होंगी जब वे स्थानीय अनुदानों के अर्थ में निहित निर्धारित शर्तों का पालन करती हैं। 
  14. आठ राज्यों के लिए पंचाट अवधि (2010-15) में रू. 51,800 करोड़ का कुल आयोजना भिन्न राजस्व अनुदान अनुशासित किया गया है 
  15. वर्ष 2011-12 से 2014-15 के चार वर्षों के लिए सड़कों व पुलों के अनुरक्षण अनुदान हेतु रू. 19,930 करोड़ की राशि की अनुशंसा 
  16. प्रारम्भिक शिक्षा के लिए अनुदान राशि रू. 24,068 करोड़ की अनुशंसा 
  17. राज्य विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए रू. 27,945 करोड़ के अनुदान की अनुशंसा 
  18. वन, अक्षय ऊर्जा तथा जल क्षेत्र प्रबन्धन अनुदानों के रूप में रू. 5,000 करोड़ अनुदान की अनुशंसा 
  19. राज्यों की सहायता अनुदान के रूप में पंचाट अवधि के लिए रू. 3,18,581 करोड़ की कुल राशि अनुशंसित की गई हैं। 
  20. स्थानीय निकास तथा 13 वाँ वित्त आयोग ग्राम पंचायतों तथा स्थानीय नगरीय निकायों के सम्बन्ध में बँटवारे के लिये आयोग ने जो कसौटी दी है
इस तरह 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों से 2010-11 से 2014-15 की पाँच वर्षों की अवधि में राज्यों को केंन्द्रीय करों एवं शुल्कों के हिस्से के रूप में कुल रू. 14,48,096 करोड़ तथा सहायता अनुदान के रूप में रू. 2,58,581.0 करोड़ अर्थात् कुल रू. 17,06,677.0 करोड़ प्राप्त होंगे 13वें वित्त आयोग ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि यदि किसी राज्य को केंन्द्रीय करों एवं शुल्कों में छोटी-सी धनराशि प्राप्त हो रही है, किन्तु पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक क्षेत्रक शिक्षा एवं स्वास्थ के विकास तथा सड़कों आदि के अनुसरण से जुड़ी आवश्यकताएं अधिक हैं तो उसे अनुदान सहायता के रूप में अधिक धनराशि प्राप्त हो जाए जैसे कि पूर्वोत्तर के राज्य तथा जम्मू-कश्मीर 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों से महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडू, कर्नाटक, हरियाणा तथा पंजाब जैसे विकसित राज्यों को अपेक्षाकृत कम धन राशि प्राप्त हो सकी है, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, ओडिशा तथा राजस्थान जैसे पिछड़े राज्य अधिक धनराशि प्राप्त करने में सफल रहे हैं।

13वें वित्त आयोग की इस बात की सराहना की जानी चाहिए कि उसने केन्द्र एवं राज्य सरकारों को अपने राजस्व घाटों सहित सकल राजकोषीय घाटों में कमी लाने के लिए विशिष्ट उपाय अपनाने का एक रोडमैप तैयार किया है साथ ही इस बात पर भी बल दिया है कि राज्यों की कर राजस्व अर्जन की सम्भाव्यता के पूर्ण उपयोग द्वारा ऋण लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके। 

13वें वित्त आयोग ने भारतीय लोकतंत्र में पंचायती राज संस्थाओं तथा स्थानीय निकायों के महत्व को समझते हुए उनके विकास हेतु पाँच वर्षों की अवधि के लिए रू. 87519 करोड़ अनतरिक्त किए जाने की सिफारिश की है 13वें वित्त आयोग ने पर्यावरण संरक्षण से विभिन्न मुद्दो, प्राथमिक शिक्षा के विस्तार, शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, जल संभरण परियोजनाओं, आपदाओं से जूझने, नागरिकों को विशिष्ट पहचान संख्या आवंटित करने जैसे लोक महत्व के मुद्दों पर गम्भीरता पूर्वक विचार किया तथा इनसे सम्बन्धित राज्यों की छोटी-से-छोटी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए धनराशियाँ आवंटित की पुलिस व्यवस्था में सुधार तथा पुलिस बलों को आधुनिकरण तथा न्याय वितरण व्यवस्था में सुधार लाने जैसे मुद्दे भी आयोग की प्राथमिकता में रहे हैं। 

राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण एवं विकास हेतु केन्द्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के माध्यम से तथा सार्वजनिक निजी सहभागिता से संशाधन मुहैया करा रही है, लेकिन राज्यों का सड़क तंत्र जर्जर हालत में है अनेक प्रान्तीय मार्गों पर पुराने तथा जर्जर पुलों की मरम्मत और नए पुलों के निर्माण की आवश्यकता है 13वें वित्त आयोग ने इस तथ्य पर गम्भीरतापूर्वक विचार करते हुए सड़कों एवं पुलों के अनुरक्षण हेतु रू. 19,930 करोड़ दिये जाने की सिफारिश की है। 

कुल मिलाकर 13वें वित्त आयोग की सिफारिशें इतनी अधिक संतुलित एवं परिमार्जित हैं कि किसी भी राज्य केंन्द्र में सत्तासी कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों द्वारा शासित अथवा विपक्षी दलों द्वार शासित की ओर से विरोध का कोई स्वर नहीं उठा है संघीय वित्त की सफलता की इससे बड़ी कसौटी और क्या हो सकती है?

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