आतंकवाद के कारण और उपाय

In this page:


आतंकवाद एक ऐसा शब्द हैं जिसे सुनकर दहशत हो जाती हैं कि किस का घर उजडने वाला हैं क्योंकि आतंकवाद के कारण भारत देश नहीं वरन समुचा विश्व परेशान हैं। कुछ ऐसे सिरफिरे लोग जोकि विक्षित्प मानसिकता के होते हैं उनके द्वारा यह कृत किया जाता है। ‘‘‘‘‘कटट्ररपंथ’’’’’ और आतंकवाद पूरे विश्व की ज्वलंत समस्या हैं, शायद ही कोई देश इस अभिशाप से अछूता रहा हैं। सेना समर्थित कमजोर सरकारों की शह मिलने से आतंकवाद को फलने-फूलने का भरपूर मौका मिला अकूत तेल भंडारों से लवरेज देशों की बेहिसाबी धन-संपत्ति और भटकी हुई युवाशक्ति ने उनके लिए खाद पानी का काम किया हैं। फिर भी सियासतदां ऐसे भस्मासुरों को वरदान देने से बाज नहीं आ रहे हैं। मीटिंगों में बार-बार कहा जा रहा हैं कि शांति और स्थायित्व कायम किया जाए सभी देशों में इस हेतु साझा कदम उठाए जाए। हालांकि दृढ इच्छाशक्ति और अदम्य साहस के बलबूतें अमरीका जैसे सर्वशक्तिमान राष्ट्र ने आंतकी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने दी।

आतंकवाद के कारण

  1. उचित समाजीकरण का न होना।
  2. विघटित परिवार
  3. गंदी बस्ती
  4. गरीबी
  5. बेरोजगारी
  6. आसामाजिक तत्वों द्वारा बहलाना फुसलाना
  7. सामाजिक पर्यावरण
  8. इन कारणों के साथ ही अन्य अनेक कारण हैं। बालक आतंकवादी बन जाते हैं।

आतंकवाद के उपाय

  1. परिवार द्वारा बालक/ बालिकाओं का उचित लालन-पालन करना उनकों उपयुक्त वातावरण देना उन्हें प्यार देना, पढाई, लिखाई, आदि पर पर्याप्त ध्यान देना आदि। 
  2. परिवारिक सामंजस्य पति पत्नी के बीच उचित तालमेल न होना तलाक हो जाना, या परिवार द्वारा गलत कार्य करना इनसे भी बच्चे भी गलत हाथों में चले जाते हैं। अत: मॉं-बाप, परिवार का विशेष कत्र्तव्य हैं कि वे परिवारिक वातावरण आपसी सामंजस्य अच्छा बनाकर रखें।
  3. सामाजिक पर्यावरण-बच्चों को भेदभाव की शिक्षा न देकर सवधर्म सभी लोग एक हैं। जिससे उनके कोमल मानसिकता पर गलत प्रभाव न पडें। 4. मीडिया एवं देश की भी जिम्मेदारी हैं कि उन्हें उचित शिक्षा दी जाए। 
  4. पुलिस द्वारा नाबालिक बच्चों को पुलिस थाने की जगह बालसुधार गृह में रखा जाए। 
  5. सबसे महत्वपूर्ण हैं संस्कार यदि इनका रोपण सही हैं तो पौधा भी धूप छॉव आदि से बचकर भली प्रकार फली फूलित होगा
  6. बेरोजगारी और गरीबी इन्हें खत्म किया जाए -सरकार प्रयत्न करें यह दोनों चीजें व्यक्ति से कुछ भी करवा सकती हैं।

Comments