वन संरक्षण के उपाय (Forest Conservation Measures)

वनों का हर दृष्टि से समाज में मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। वनों का महत्व मानव सभ्यता के विकास साथ जुड़ा हुआ है।

वनों के विनाश का कारण (Cause of destruction of forests)

वनों के विनाश के कई कारण गिनाये जा सकते हैं जिनका मुख्य रूप से जिम्मेदार मनुष्य है। वनों के विनाश के पीछे मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या का दबाव और बढ़ते पषुधन की आवश्यकता है। वन हमारे दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। अत: वनों से हम लेते तो बहुत कुछ हैं पर वनों को देते बहुत कम है। जितने वन काटते हैं उस अनुपात में वृक्षारोपण और संरक्षण का प्रयास नहीं होता है। परिणामस्वरूप वन क्षेत्र का निरन्तर ह्यस होता जा रहा है।

बढ़ती आबादी ने अपने आवास, भोजन आदि प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए वनों का निरन्तर विनाश किया है। वनों को निरन्तर काटा जा रहा है। आबादी की बसाहट के लिए तो कहीं खेती के नाम पर। वनों के विनाष के लिए औद्योकरण भी कम जिम्मेदार नहीं है। कच्चे माल के लिए वनों का काटा जाता है, ईधन के लिए वनों को काटा जाता है।

इसके अलावा जल संकट के कारण भी वन क्षेत्र प्रभावित होते हैं। मनुष्य ने सतही जल ही नहीं, भूमि का जल का भी इतना दोहन कर लिया है कि पेड़ों की जड़ों को आवश्यक पानी मिलता ही नहीं है। परिणाम यह होता है कि बड़े-बड़े वन क्षेत्र सूखते जाते है। मनुष्य ने अपने हिस्से से अधिक पानी का दोहन किया, पेड़-पौधों और अन्य जैवमण्डल के लिए जल की मात्रा कम होने लगी। जल पर्याप्त मात्रा में न मिल पाने के कारण वन क्षेत्र सूखते जा रहे हैं।

वन संरक्षण के उपाय (Forest Conservation Measures)

वनों की वृद्धि के लिए वृक्षारोपण और जागरूकता अभियान चलाये जा रहे है। वन संरक्षण के कुछ प्रमुख उपाय इस प्रकार हैं-
  1. प्राकृतिक संसाधनों का रख-रखाव - प्राकृतिक संसाधन जिनका वन से सीधा सम्बन्ध है उनकी संरक्षण और उचित रख-रखाव से वन संरक्षण भी किया जा सकता है।
  2. ईधन के वैकल्पिक स्रोतों की खोज - ईधन की आवश्यकता के कारण वनों को सर्वाधिक हानि होती है। पेड़ों को काटा जाता है। इससे बचने के लिए वैकल्पिक ईधन जैसे गैस, मिट्टी का तेल आदि की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोषिष की जा रही है। 
  3. अवैध कटाई रोकने के लिए प्रभावी कदम - वनों को इमारती लकड़ी के लिए अवैध रीति से काटा जाता है। इसको रोकने के लिए सरकारी स्तर पर राज्य सरकारों को सुविधा और सहायता प्रदान की जा रही है।
  4. मरूस्थलीकरण को रोकना - मरुस्थलीय समस्याओं से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाये जा रहे हैं। वनों का पर्याप्त मात्रा में पानी आदि की व्यवस्था कर मरुस्थल की समस्या से निपटा जा सकता है।
  5. वन-अग्नि रोकना - वनों में अधिकतर किन्हीं कारणों से आग लग जाती है। 
वन संरक्षण के उपाय

इनके अलावा भी वन संरक्षण के लिए कई उपाय किये जा सकते हैं। कुछ उपाय निम्नवत् हैं-
  1. पेड़ों की कटाई पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाये।
  2. फर्नीचर के लिए वैकल्पिक रूप से प्लास्टिक अथवा एल्यूमिनियम का उपयोग हो। 
  3. शवदाह हेतु लकड़ी का उपयोग न हो इसके लिए विद्यतु शवदाह गृहों की स्थापना की जायें।
  4. पषुधन की चराई के लिए गोचरों की पुरानी पद्धति अपनाई जाये।
  5. अधिक से अधिक वृक्ष लगाये जायें।
  6. राष्ट्रीय वनस्पति के अनुसार वन संरक्षण और वनोपज की देखभाल को प्रोत्साहन दिया जाये।
  7. वृक्षारोपण के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाये और उन्हें पौधे उपलब्ध कराये जायें।
  8. वनों की रक्षा से ही जीवन की रक्षा निहित है। इसे प्रचारित किया जाये।

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