अन्तर्वैयक्तिक संचार क्या है?

अन्तर्वैयक्तिक संचार क्या है (What is Interpersonal Communication) ? 

अन्तर्वैयक्तिक संचार वह है, जिसमें दो व्यक्तियों के बीच या एक व्यक्ति तथा समूह के बीच संचार होता है। जब संचार दो व्यक्तियों के बीच होता है तो उसे द्विकीय संचार कहा जाता है। अन्तर्वैयक्तिक संचार प्रत्यक्ष होता है तथा इसके बीच में किसी संचार तकनीकी की आवश्यकता नहीं होती। यह वैयक्तिक संबंधों एवं सामाजिक व्यवस्थाओं को बनाए रखने एवं विकसित करने के लिए आवश्यक माना जाता है। बिना अन्तर्वैयक्तिक संचार के सामाजिक समूह की इकाइयों के समूह के रूप में कार्य करने के बारे में सोचना कठिन है। कोई समुदाय या समूह केवल व्यक्तियों का समूह ही नहीं होता अपितु सुसम्बद्ध इकाई होती है। संचार के द्वारा इसमें एकता और पहचान की अभिव्यक्ति होता है। अन्तर्वैयक्तिक संचार द्वारा संबंध बनाए जाते हैं और पोषित किए जाते हैं।

अन्तर्वैयक्तिक संचार के मूल तत्त्व (Fundamentals of Interpersonal Communication)

अन्तर्वैयक्तिक संचार मौखिक या अमौखिक हो सकता है। इस प्रक्रिया में मात्र प्रेषक तथा ग्रहणकर्त्त्ाा दोनों को परस्पर संदेश की संचार प्रक्रिया का पता होता है। अन्तर्वैयक्तिक संचार दो प्रकार के हो सकते हैं: परस्पर विनिमय और पारस्परिक क्रिया। परस्पर विनिमय से हमारा अभिप्राय है मित्रों, पारिवारिक सदस्यों तथा प्रेमियों इत्यादि के बीच होने वाली निजी बात। यह संचार अधिक अनौपचारिक होता है तथा इसका सार्वजनिक या सामाजिक नियमों के अनुरूप होना आवश्यक नहीं है।

दूसरी तरफ पारस्परिक क्रिया में लोग व्यवहार के स्थापित कुछ नियमों के अनुरूप एक दूसरे से संबंधित होते हैं। इनमें सामाजिक शिष्टाचार तथा व्यवहार भाषा आदि को नियंत्रित करन े वाले धार्मिक या सामाजिक नियम शामिल हैं। अधिकांश पारस्परिक क्रिया से आरंभ हुए संबंध परस्पर विनिमय स्तर तक पहुँच जाते हैं।

अन्तर्वैयक्तिक संचार में प्रेषण और ग्रहण प्रक्रिया प्राय: एक साथ होती है जिसमें यह कहना कठिन है कि कब एक व्यक्ति संदेश भेज रहा है तथा कब प्राप्त कर रहा है। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति या समूह से बात कर रहा है तो वह संदेश देने के अतिरिक्त उनकी जनता की प्रतिक्रिया का भी तलाश करता है। अपने-अपने श्रोताओं से मिलने वाली सूचनाओं के अनुसार अपना संदेश तैयार करता है। यदि वह श्रोताओं को ध्यान रहित रुचि हीन पाता है तो वह अपने कथन के कुछ भागों को छोड़ सकता है उस विषय को परिवर्तित कर सकता है या वार्तालाप बंद कर सकता है।

प्रेषक अपने संदेश को निरंतर श्रोताओं की प्रतिक्रिया जैसे ध्यान, संदेश समझन े की योग्यता तथा स्वीकृति आदि के अनुसार परिवर्तित करता रहता है वह निरंतर श्रोताओं के चेहरे के भावों, भंगिमाओं, आवाजों आदि पर सटीक ध्यान रखता/रखती है। अन्तर्वैयक्तिक संचार में दो पक्षों में निरंतर क्रिया होती है तथा दोनों ही पक्ष बोलते या प्रेषित करते हैं। यह संचार का रूप लचीला होता है।

उदाहरण के लिए, नानी-दादी बच्चे को सुलाने के लिए कहानियां कहती हैं या लोरियां सुनाती है। वे देखती है कि यदि बच्चा सो गया तो वह अपनी कहानी या लोरी को पूरा होने से पहले ही बीच में अधूरा छोड़ देती हैं।

हमें अन्तर्वैयक्तिक संचार के माध्यम से अपने बारे तथा दूसरे लोगों से अनेक सूचनाएँ प्राप्त होती हैं। प्राप्त सूचनाओं की संख्या तथा उनका महत्त्व दूसरों के साथ संचार में तथा उनके साथ वार्तालाप में शामिल करने की हमारी इच्छा पर निर्भर करता है। अन्तर्वैयक्तिक संचार में काफी 87 विकल्प रहते हैं। इसमें निर्णय करने की आवश्यकता होती है। हम मिलने वाले व्यक्तियों या समूहों से वार्तालाप कर भी सकते हैं या उनकी अनदेखी भी की जा सकती है।

उदाहरण के लिए, जब हम रेल यात्रा कर रहे होते हैं तो हम अपने आप को अनजान लोगों के बीच पाते हैं। हमारी काफी यात्रा बिना ही संचार के हो सकती है या फिर वार्तालाप आरंभ हो सकती है और तब अन्तर्वैयक्तिक संचार के माध्यम से संबंध बनने लगते हैं। हमारे अनेक परिचित एवं मित्र हमारे अन्तर्वैयक्तिक संचार के प्रयत्नों के कारण या उनमें शामिल होने की इच्छा के कारण बन जाते हैं।

अन्तर्वैयक्तिक संचार में दूसरों के साथ परस्पर प्रभावशाली क्रिया के लिए कौशलों (निपुणताओं) की आवश्यकता होती है। सामाजिक नियमों, व्यवहार की जानकारी, शिष्टाचार, सुनने की योग्यता और इच्छा, एक-दसू रे के प्रति रुचि एवं सम्मान तथा अपनी सूचनाओं को बांटने की इच्छा आदि ऐसे महत्त्वपूर्ण घटक हैं, जिनमें सफल अन्तर्वैयक्तिक संचार कायम होता है।

अन्तर्वैयक्तिक संचार में बाधाएं (Barriers to interpersonal communication)

अन्तर्वैयक्तिक संचार में अनेक बाधाएं हो सकती हैं। इसमें सामाजिक अथवा सांस्कृतिक पूर्वाग्रह, धार्मिक संबद्धताओं के कारण लोगों को प्रभावित करने वाली श्रेष्ठ हीन भावनाएँ, अपने बारे में सांस्कृतिक विश्वास, आर्थिक स्तर, जातीय पहचान, आदि शामिल हैं। भारत में जाति प्रथा और जातीय वर्णक्रम विभिन्न जाति क्रम के लोगों के बीच प्रभावशाली अन्तर्वैयक्तिक संचार में रुकावट डाल सकते हैं। यद्यपि ऐसी बाधाएं प्रभावशाली संचार में बाधा डालती हैं तो भी अन्तर्वैयक्तिक संचार का सामाजिक भिन्नताएँ समाप्त करने में प्रभावशाली प्रयोग किया जा सकता है।सांस्कृतिक पूर्वाग्रह भी अन्तर्वैयक्तिक संचार में एक और रुकावट बन जाते हैं। हिटलर के द्वारा जातीय श्रेष्ठता के सिद्धांत को बढ़ावा देने से जर्मनी में लाखों यहूदियों को मार डाला गया था।

सामाजिक बाधाओं में महिलाओं, सामाजिक रूप से तिरस्कृत वर्ग तथा आर्थिक सुविधाओं से वंचित वगोर्ं के विरुद्ध भेदभाव शामिल हैं।

संचार बाधाओं में आयु, मानसिकता तथा –ष्टिकोण मं े भिन्नता, विवाहित साथियों एवं पारिवारिक सदस्यों के बीच वार्तालाप का अभाव शामिल हैं।

इससे अरुचि, अकेलापन, उदासीनता तथा अन्य व्यक्तित्व संबंधी कुंठाएँ पैदा हो सकती हैं। अंतर्मुखी स्तर पर प्रभावशाली परस्पर कार्यकलाप की असफलता से व्यक्ति अंतर्मुखी, समाज से कटा हुआ अनुभव करने लगता है। ऐसे अनुचित तीव्र व्यवहार से व्यक्ति का व्यवहार हिंसक तथा आत्मघाती तक हो सकता है।

अन्तर्वैयक्तिक संचार में सफलता का अर्थ है, इन सब बाधाओं तथा अन्य बाधाओं को दूर करना। इस प्रक्रिया में दोनों पक्ष शामिल होते हैं।

अन्तर्वैयक्तिक स्तर पर प्रभावशाली संचार की असफलता अनेक सामाजिक और पारिवारिक विकृतियों का कारण बन जाती है।

प्रभावशाली अन्तर्वैयक्तिक संबंध परिवार और समुदाय में सामाजिक संबद्धता स्थापित कर सकते हैं। प्रभावशाली सामाजिक संचार व्यक्ति और समाजों को इस प्रकार बनाता है, जिसे डेविड राइजमैन के अनुसार ‘आंतरिक रडार’ कहा है, जिससे व्यक्ति स्वयं को समाज में स्थापित करता है तथा अनुकूलित करता है।

अन्तर्वैयक्तिक संचार के गुण (Properties of interpersonal communication)

अन्तर्वैयक्तिक संचार का एक लाभ यह है कि यह हमारे सामाजिक बंधनों को स्थापित करता है तथा कायम रखता है। जब व्यक्ति परस्पर एक दूसरे के साथ प्रभावी रूप से संचार करते हैं तो उनको पता लगता है कि वे उनके साथ जुड़ सकते हैं। मित्र, प्रेमी, सहकर्मी, अधिकारी, पड़ोसी तथा पारिवारिक सदस्यों के रूप में अपनी पहचान बना सकते हैं।
  1. अन्तर्वैयक्तिक संचार समाज के लोगों को सही स्थिति में बनाए रखता है, जिससे सामाजिक स्वीकृति मिलती है। इस प्रकार नीरसता एवं एकाकीपन से छुटकारा मिलता है।
  2. यह दूसरों के साथ अपने लक्ष्य पूरे करने में सहायता करता है।
  3. अन्तर्वैयक्तिक संचार सहयोग एवं योगदान का आधार तैयार करता है, जिससे हम अपने इच्छित उद्देश्य के पूरे करने में सफल हो सकते हैं।
  4. इससे लोगों को परस्पर सामाजिक क्रिया के नियम जानने एवं उनका पालन करने में सहायता मिलती है। हमारा समाज नियमों से चलता है। नियमों का उल्लंघन या सामाजिक नियमों को पालन करने की अयोग्यता से व्यक्ति का बहिष्कार तथा अकेलापन हो सकता है।

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