बाबरनामा की भाषा और अनुवाद

बाबर के विशेष महत्त्वपूर्ण एवं रोचक ग्रंथ बाबरनामा में उसके 47 वर्ष तथा 10 मास के जीवनकाल में से लगभग 18 वर्ष का ही विवरण उपलब्ध होता है और वह भी बीच-बीच में अधूरा मिलता है। बाबर की आत्मकथा में जिन वर्षों का उल्लेख मिलता है, वे निम्न प्रकार हैं -

  1. सन् 1493-94 से 1502-03 ई. तक की घटनाओं का वृतान्त, परन्तु इसमें अंतिम घटनाओं का विवरण उपलब्ध नहीं है। 
  2. सन् 1504 से 1508 ई. तक की घटनाओं का उल्लेख मिलता है। 
  3. सन् 1508-09 ई की कुछ घटनाओं का उल्लेख मिलता है 
  4. सन् 1519 से जनवरी 1520 ई. तक की घटनाओं का उल्लेख मिलता है। 
  5. नवम्बर 1525 से 2 अप्रैल 1528 ई. तक की घटनाओं का उल्लेख मिलता है। यह भाग भारत से सम्बन्धित है। 
  6. सितम्बर 1528 से सितम्बर 7, 1529 ई. तक की घटनाओं का उल्लेख मिलता है। परन्तु इसमें भी 1528 ई. के कुछ माह का विवरण प्राप्त नहीं होता।
बहुत संभव है कि बाबर ने दो पुस्तकें तैयार की होगी। प्रथम पुस्तक दैनिक डायरी के रूप में रही होगी, जिसमें वह दैनिक घटनाओं का विवरण उसी रात्रि में अथवा शीघ्र ही जब कभी उसे अवसर मिता होगा, लिखता गया होगा। तत्पश्चात उसने दैनिक डायरी के प्रारम्भिक भाग में उचित संशोधन करके प्रत्येक वर्ष का विवरण लेखों के रूप में लिखना प्रारम्भ कर दिया होगा। इस प्रकार उसके ग्रंथ की कम से कम दो प्रतियां रही होंगी। परंतु अब दोनों ग्रंथों का पता नहीं है। संभवत: दोनों ही प्रतियां नष्ट हो गई होंगी।

बाबरनामा से यह ज्ञात नहीं होता है कि बाबर ने अपने इस ग्रंथ का नाम क्या रखा था। ख्वाजा कलां को इस ग्रंथ की हस्तलिपि भेजते समय भी उसने इस ग्रंथ का कोई नाम नहीं लिखा। परंतु गुलबदन बेगम के ‘हुमायूंनामा’ में ‘वाकेआनामा’ शब्द का प्रयोग हुआ है।

इसी प्रकार ‘अकबरनामा’ तथा अन्य फारसी के ग्रंथों में भी इस संदर्भ में ‘वाकेआत’ शब्द का प्रयोग हुआ है। परंतु इससे यह निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता कि इस ग्रंथ का नाम ‘वाकेआते बाबरी’ रहा होगा। ‘हुमायूनामा’ ‘अकबरनामा’ तथा ‘पादशाहनामा’ आदि ग्रंथों के अनुवाद में इस ग्रंथ का नाम कुछ पांडुलिपियों में ‘बाबरनामा’ लिखा हुआ मिलता है। अन्य ग्रंथों में इसका नाम ‘तुजुके बाबरी’ लिखा हुआ प्राप्त होता है। 

निष्कर्ष तौर पर यह कहा जा सकता है कि मध्यकाल में यह ग्रंथ हिन्दुस्तान में ‘वाकेआते बाबरी’ के नाम से ख्यात रही होगी। परंतु अब अधिकांशत: इस ग्रंथ को ‘बाबरनामा’ अथवा ‘तुजुके बाबरी’ के नाम से पुकारा जाता है।

बाबरनामा की भाषा

बाबर ने अपने ग्रंथ बाबरनामा की रचना अपनी मातृभाषा अर्थात् चगताई तुर्की में की है। रचना-शैली - बाबरनामा में दो प्रकार की रचना शैली देखने को मिलती है।

बाबरनामा के अनुवाद

अन्यान्य भाषाओं में बाबरनामा के अनुवाद हो चुके हैं जिनके कारण बाबरनामा को काफी ख्याति प्राप्त हुई है। मुख्य अनुवादों का विवरण है -

बाबरनामा का फारसी अनुवाद 

बाबर के सद्र शेख जैन बफाई ख्वाफी ने बाबरनामा के हिन्दुस्तान से संबंधित भाग का काव्यमय फारसी भाषा में अनुवाद किया। बाबरनामा का दूसरा फारसी अनुवाद सन् 1586 ई. में मिर्जा पायन्दा हसन गजनवी ने प्रारम्भ किया। किन्तु वह इसे पूर्ण नहीं कर सका। बाद में मुहम्मद कुली मुगुल हिसारी ने इसे पूर्ण किया। किन्तु बाबरनामा का सबसे प्रसिद्ध फारसी अनुवाद मिर्जा अब्दुर्रहीम खानेखाना बिन बैरमखां खानेखानां का है। 

इसे अबुल फजल के अकबरनामा के लिए अकबर के आदेशानुसार प्रारम्भ किया गया। उसने इसे नवम्बर 1589 ई. के अंतिम सप्ताह में पूर्ण कर अकबर को काबुल में समर्पित किया।

बाबरनामा का अंग्रेजी अनुवाद 

(1) विलियम एर्सकिन ने फारसी भाषा से अंग्रेजी भाषा में रूपान्तर किया। (2) ले ईडेन ने अपना अंग्रेजी अनुवाद तुर्की से तैयार किया था। (3) श्रीमती बेवरिज ने बाबरनामा का तुर्की भाषा में हस्तलिखित ग्रंथ के आधार पर अंग्रेजी भाषा में अनुवाद किया। यही कारण है कि बेवरिज का अनुवाद अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय माना जाता है। बाद के लेखकों ने अधिकांशत: इसी ग्रंथ को अपना आधार बनाया है।

बाबरनामा का फ्रेंच भाषा में अनुवाद 

पावेत दी कार्तले ने स् 1871 ई. में बाबरनामा का अनुवाद फ्रेंच भाषा में किया।

बाबरनामा का हिन्दी भाषा में अनुवाद

विलियम एर्सकिन के अंग्रेजी अनुवाद का हिन्दी रूपान्तर श्री केशवकुमार ने किया है। इस प्रकार विभिन्न भाषाओं में बाबरनामा का रूपान्तर इस ग्रंथ की लोकप्रियता का विशेष परिचायक है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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