मशीनी अनुवाद के प्रकार

मशीनी अनुवाद मशीन द्वारा किया जाने वाला अनुवाद कार्य है और यह मशीन आधुनिक संसार के सबसे लोकप्रिय यंत्रों में से एक ‘कंप्यूटर’ है। अतः इसे हम कंप्यूटर अनुवाद भी कह सकते हैं। सामान्य तौर पर देखें तो मशीनी अनुवाद संगणक प्रौद्योगिकी का वह अनुप्रयोग है जिसमें स्रोतभाषा से दूसरी लक्ष्यभाषा में अनुवाद प्राप्त किया जाता है। ये भाषा युग्म कोई-सी भी दो भाषाएँ हो सकती हैं। 

मशीनी अनुवाद के प्रकार

अगर अनुवादक द्वारा ही अनुवाद-कार्य होता है तो वह ‘विशुद्ध मानव अनुवाद’’ कहलाता है किंतु कंप्यूटर के विकास ने मशीनी अनुवाद को संभव बना दिया है। वास्तव में कंप्यूटर ने अनुवाद की प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बना दिया है। कंप्यूटर अनुवाद प्रणाली की जटिलता मुख्य रूप से स्रोत और लक्ष्यभाषा के व्याकरणिक स्तरों, उनके भाषिक पक्षों तथा शब्दावली पर निर्भर करती है। इस आधार पर कंप्यूटर अनुवाद को सिद्धांततः दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। ये हैं - ‘समान भाषा परिवार की दो भाषाओं के बीच अनुवाद’ और ‘दो अलग-अलग भाषा परिवारों की भाषाओं में परस्पर अनुवाद’। 

पहली विधि समान भाषा परिवार की दो अलग-अलग भाषाओं के बीच कंप्यूटर के जरिए अनुवाद करने से संबंधित है, जो अपेक्षाकृत सरल होती है। उदाहरण के लिए, ‘आर्यभाषा परिवार’ की दो भाषाओं (बांग्ला-हिंदी, मराठी-हिंदी आदि) में परस्पर अनुवाद करना इस प्रकार के अनुवाद में सहजता एवं स्वाभाविकता होने से प्रक्रिया अधिक सकारात्मक परिणाम वाली होती है। 

दूसरी विधि अलग-अलग परिवार की उन भाषाओं के बीच कंप्यूटर अनुवाद से संबंधित है जिनमें वाक्य-विन्यास और शब्दावली के स्तर पर काफी भिन्नता पाई जाती है। उदाहरण के लिए, अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद। किंतु जहाँ तक मशीन अनुवाद के प्रकारों का संबंध है, इसे मानव-मशीन सहभागिता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। अनुवाद में कंप्यूटर की सहभागिता के कारण अस्तित्व में आई ‘कंप्यूटर अनुवाद’ अथवा ‘मशीनी अनुवाद’ की संकल्पना दो प्रकार से मूर्त रूप प्राप्त करती है। ये हैं - ‘पूर्णतः स्वचालित कंप्यूटर अनुवाद’, और ‘अर्ध-स्वचालित कंप्यूटर अनुवाद’।

मशीनी अनुवाद के प्रकार

1. पूर्णत स्वचालित मशीनी अनुवाद 

 ‘पूर्णतः स्वचालित मशीनी अनुवाद’ में आम तौर पर मानव का हस्तक्षेप आवश्यक नहीं समझा जाता है। यहाँ मानव का हस्तक्षेप का अर्थ यह है कि कंप्यूटर द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुवाद में मानव-अनुवादक के स्तर पर मशीनी अनुवाद संशोधन-परिवर्धन नहीं किया जाता। इसमें अनुवाद की पूरी प्रक्रिया मशीन के द्वारा तय की जाती है और मनुष्य किसी भी तरह से और किसी भी रूप में कोई भूमिका नहीं निभाता। इस प्रकार के कंप्यूटर अनुवाद में व्यक्ति पूरी तरह से कंप्यूटर अनुवाद प्रणाली पर निर्भर रहता है। इसलिए इसे पूर्ण मशीनी अनुवाद भी कहा जाता है 

2. अर्ध-स्वचालित मशीनी अनुवाद

विश्वभर में प्रचलित कोई भी मशीनी अनुवाद प्रणाली ऐसी नहीं है, जिसमें मानव का हस्तक्षेप बिलकुल न हो। इस तरह मशीनी अनुवाद प्रणालियाँ सिद्धांततः पूरी तरह से स्वचालित और सामान्य उद्देश्यीय नहीं हैं। इसलिए ‘अर्ध-स्वचालित मशीनी अनुवाद’ की अवधारणा बनी रहती है। 

मानव-अनुवादक और कंप्यूटर की इस परस्पर सहभागिता के परिप्रेक्ष्य में अर्ध-स्वचालित मशीनी अनुवाद को ‘मशीन-साधित मानव अनुवाद‘ और ‘मानव-साधित मशीनी अनुवाद’  के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। मशीनी अनुवाद के क्षेत्रा में विश्व में जो अधिकतर प्रणालियाँ विकसित की गई हैं, उनमें इस प्रकार की सहायता की बराबर स्थिति बनी रहती है। 

1. मानव-सहायक मशीनी अनुवाद - ‘मानव-साधित मशीनी अनुवाद’ प्रणाली मानव-नियंत्रित अनुवाद है जिसमें कंप्यूटर अनुवाद प्रणाली मनुष्य के सहायक के रूप में काम करती है। इसके अंतर्गत अनुवाद कार्य तो कंप्यूटर द्वारा संपन्न होता है किंतु इस प्रक्रिया में मानव की सहायता ली जाती है। इसमें मनुष्य की सहभागिता-भूमिका कहीं न कहीं निरंतर बनी रहती है। यहाँ सहभागिता का अर्थ है - संदिग्धार्थक अंशों के अनुवाद का मानव द्वारा संपादन। इसमें संदिग्धार्थक वाक्यों के निहितार्थ को ध्यान में रखते हुए मानव की सहायता से ठीक करके मूल पाठ की श्लिष्ट संरचनाओं का अर्थ निर्धारण किया जाता है। मानव द्वारा अनुवाद का संपादन, कंप्यूटर द्वारा अनुवाद किए जाने से पूर्व भी हो सकता है, कंप्यूटर द्वारा अनुवाद किए जाने के दौरान भी और कंप्यूटर-अनुवाद के पश्चात भी। इसके अलावा, अनुवाद-पूर्व मानव-मशीन में अंतक्रिया करते हुए भी अनुवाद संभव है।

 2. मशीन-साधित मानव अनुवाद: ‘मशीन-साधित मानव अनुवाद’ प्रणाली को ‘कंप्यूटर साधित मानव अनुवाद’ अथवा ‘कंप्यूटर साधित अनुवाद’ भी कहा जाता है। इस प्रकार के अनुवाद में अनुवादक की भूमिका केवल संपादन के स्तर पर ही न होकर, मशीनी अनुवाद की समस्त प्रक्रिया के दौरान बनी रहती है। इसमें अनुवाद संबंधी अधिकतम कार्य मुख्य रूप से मानव-अनुवादक द्वारा किया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर अनुवादक कंप्यूटर की सहायता ले लेता है। इस प्रणाली में कंप्यूटर, अनुवाद कार्य में सहायता करने वाला कार्य-केंद्र बन जाता है। इसमें प्रत्येक अनुवादक व्यक्तिगत कार्य-केंद्र बना सकता है और कार्य-विशेष की जरूरतों के अनुसार उसे रूपांतरित भी कर सकता है। इस प्रकार कंप्यूटर-सहायक मानव अनुवाद में लचीलापन है जो अनुवादक को स्वतंत्रता प्रदान करता है। इससे अनुवादक के समय की बचत होती है। वैसे, इस प्रकार की प्रौद्योगिकी के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। इसके अलावा, यह प्रौद्योगिकी अनुवादकों को अधिकांशतः सुलभ भी नहीं है। 

मशीन-साधित मानव अनुवाद प्रणाली एक व्यापक अवधारणा है जिसमें सरल-जटिल, हर प्रकार के साधन-उपकरण शामिल हैं। इसमें बड़ी सावधानी से तैयार किए गए व्याकरण जाँच साॅफ्टवेयर, सही शब्दों वाले मानक शब्दकोश साॅफ्टवेयर, समनुक्रमणिका, अनुवाद स्मृति-कोश, इलेक्ट्राॅनिक शब्दकोश और शब्दावली डाटाबेस के साथ-साथ समरूप कार्यक्रम आदि विशिष्ट प्रकृति के कंप्यूटर कार्यक्रमों के रूप में मानव-अनुवादक के लिए अनुवाद सहायिकाएँ शामिल हैं। 

मानव द्वारा इनका उपयोग करके अनुवाद की परिशुद्धता में सुधार किया जा सकता है। ‘लोगोस’, ‘वेडेनर’ और ‘एल्पस’ आदि कंपनियों के विभिन्न उत्पाद मशीन-साधित मानव अनुवाद पर ही आधारित हैं। आज ‘ट्रांसलेटर मैनेजर’ ‘ट्रांसलेटर्स वर्कबेंच’ ‘आॅप्टिमाइजर’ ‘ट्रेडाॅस’ और ‘यूरोलैंग’ आदि कंप्यूटर कार्यक्रमों में अनुवादक स्मृति-कोश प्रबंधक जैसे साधन-उपकरणों को व्यवहार में लाया जा रहा है। 

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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