हिंदी का भविष्य क्या है?

हिंदी विश्व में तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। बड़े दुख की बात है कि अनेक प्रयासों के बावजूद हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की अधिकारिक भाषाओं में अभी तक स्थान नहीं प्राप्त हुआ है। विश्व के चार बहुचर्चित एवं सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में भारत का नाम और स्थान महत्वपूर्ण होने के बाद भी उसकी करीब एक अरब तेईस करोड़ जनता की राष्ट्रभाषा हिंदी को नजरअंदाज किया जा रहा है जो उचित नहीं है।

अमेरिकी उपमहाद्वीप, न्यूजीलैंड, जापान, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया सहित यूरोपीय व अरब देशों में रोजगार हेतु हिंदी भाषियों का बढ़ता प्रसार हिंदी को अंतरराष्ट्रीय वातावरण प्रदान करने में सक्षम सिद्ध हो रहा है। विगत में अनेक विश्व हिंदी सम्मेलनों का सफल आयोजन हिंदी राजभाषा के सन्दर्भ में हिंदी और समकालीन चुनौतियां की दिनों-दिन बढ़ती लोकप्रियता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। विश्व के अनेक देशों जैसे मारीशस, फिजी, त्रिनीडाड, सूरीनाम, गुयाना, दक्षिण अफ्रीका, हालैंड व रूस आदि में हिंदी बोली व समझी जाती है। विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों में हिंदी का पठन-पाठन संचालित है। कहना न होगा कि हिंदी के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह एक शुभ संकेत है।

इंग्लैंड  के विद्वान डाॅ. मैग्रेसर के अनुसार ‘‘हिन्दी दुनिया की महान भाषाओं में एक है। भारत को समझने के लिए हिंदी का ज्ञान अनिवार्य है। हिंदी का महत्व आज इसलिए और भी बढ़ गया है क्योंकि भारत आज शिक्षा, उद्योग और तकनीक के हिसाब से दुनिया का अग्रणी देश है। विश्व की कुल आबादी सात अरब है। इनमें से हिंदी जानने वाले एक अरब 20 करोड़ है अर्थात प्रत्येक छठवां व्यक्ति हिंदी जानता है।

विदेश में हिंदी

दुनियाभर में फैले लगभग चार करोड़ भारतीय भी हिंदी ही बोलते हैं। इसके अलावा दुनिया के लगभग 150 विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। हिंदी समाज की जनसंख्या एक अरब से अधिक है। पूरा पाकिस्तान हिंदी बोलता है। बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, तिब्बत, म्यांमार, अफगानिस्तान और मध्य एशियाई गणतंत्रों में भी आपको हजारों से लेकर लाखों लोग हिंदी बोलते और समझते हुए मिल जाएंगे। इसके अलावा फिजी, माॅरिशस, गयाना, सूरिनाम, ट्रिनिडाड जैसे देश तो हिंदी भाषियों के बसाए हुए ही हैं।

फीजी में हिंदी

प्रथम प्रवासी भारतीय श्रमिक के फीजी में अपना पग रखते ही हिंदी का प्रवेश यहां हो गया था क्योंकि अधिकांश श्रमिक भारत के हिंदी भाषी प्रदेशों से यहां आए थे अतः यहां उन्हीं की ही भाषा स्थापित हुई और इस तरह हिंदी भारतीयों की प्रमुख भाषा बनी। आज प्राथमिक पाठशालाओं से लेकर विश्वविद्यालय तक पढ़ाई जाने वाली हिंदी फीजी की एक महत्वपूर्ण भाषा है।

माॅरिशस में हिंदी

माॅरिशस में हिंदी साहित्य की लगभग सभी विधाओं में साहित्य सृजन हो रहा है। यहां हिंदी कविता की एक सशक्त परंपरा है। माॅरिशस में हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत मणिलाल डाॅक्टर के हिंदुस्तानी पत्र से हुई। 2 मार्च, 1913 को इस सत्र में होली कविता छपी। होली कविता को माॅरिशस की प्रथम हिंदी कविता होने का श्रेय प्राप्य है। कविता के रचनाकार का नाम अज्ञात है। लक्ष्मीनारायण चतुर्वेदी रसपुंज को माॅरिशस का प्रथम हिंदी कवि माना जाता है। माॅरिशस में हिंदी में अब तक 100 से अधिक कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। 

संयुक्त अरब अमारात में हिंदी

यहां हिंदी आम भाषा की तरह बोली जाती है। दुबई और शारजाह में धनी, यूरोपीय और शासक वर्ग के अरबी लोगों को छोड़ दें तो लगभग हर व्यक्ति हिंदी बोलता और समझता है। दैनिक जरूरतों के काम करने वाले लोग जैसे घरों में काम करने वाली महिलाएं, टैक्सी ड्राइवर, घर की सफाई का काम करने वाले लोग, सब्जी बेचने वाले, सुपर मार्केट के कर्मचारी और सोने या कपड़े की दुकानवाले सब हिंदी समझते और बोलते हैं। यह सच है कि इसमें से ज्यादातर भारतीय हैं लेकिन जो लोग भारतीय नहीं हैं या जो भारतीय हैं पर जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं है वे भी यहां हिंदी का ही प्रयोग करते हैं। संयुक्त अरब अमारात में एफ॰एम॰ के कम से कम तीन ऐसे चैनल हैं जिन पर चैबीसों घंटे हिंदी गाने, समाचार और अन्य कार्यक्रम सुने जा सकते हैं। दिन भर इन पर अंतरराष्ट्रीय उत्पादों के विज्ञापन सुने जा सकते हैं। उदाहरण के लिए श्रीलंका की महिलाएं जो घर की सफाई का काम करती हैं उनमें से 99 प्रतिशत हिंदी बोलती हैं।

दक्षिण अफ्रीका में हिंदी

दक्षिण अफ्रीका में बड़े पैमाने पर हिंदी भाषी लोग रहते हैं।  यहां भारतीय भाषाएं आधिकारिक विषय के रूप में पढ़ाई जाएंगी। लगभग दो दशक पहले सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम से इन्हें हटा दिया गया था। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के 14 लाख नागरिकों के प्रतिनिधियों की अपील के बाद हिंदी, तमिल, गुजराती, तेलुगू और उर्दू को अधिकारिक रूप से पढ़ाया जाएगा।

हिंदी का भविष्य

दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों की दृष्टि हमारे देश पर है। वे यह भी जानते कि हिन्दी के बिना यहां पैठ बनाना मुश्किल ही नहीं, असम्भव है। हिन्दी सीखे बिना न तो भारतीयों के दिलों तक पहुंचा जा सकता है और न ही यहां के बाजार में पैर जमाना संभव है। आज उन्होंने इंटरनेट एवं ब्लाॅग सभी में हिन्दी भाषा को उपयोग बड़े पैमाने पर करना शुरू कर दिया है। हिन्दी की एक बड़ी खासियत यह भी है कि हम जैसा सोचते है, वैसा ही लिखते है, ऐसा इसी भाषा में सम्भव है। जब कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां तथा विदेशी टी॰वी॰ चैनलों का पदार्पण हुआ तो हिन्दी चैनल लाना भी अनिवार्य हो गया, क्योंकि बिना हिन्दी ज्ञान के यहां कारोबार करना संभव नहीं है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में हिन्दी के विज्ञापनों की भरमार है। हिन्दी का व्यावसायिक रूप खूब निखर रहा है। आज टी॰वी॰ चैनलों में 75 प्रतिशत से अधिक बाजार हिन्दी के हाथ में है। यहां तक कि कार्यक्रम चाहे अंग्रेजी में हो लेकिन विज्ञापन हिन्दी में भी दिए जाते है। विज्ञापन अंग्रेजी में होने पर भी ‘‘टैग लाइन’’ हिन्दी में होना, हिन्दी के प्रति जनता के बढ़ते प्रेम को दर्शाता है।

विश्व में हिन्दी फिल्मों का बहुत बड़ा बाजार है। हिन्दी सॉन्ग और फिल्म विदेशों में धूम मची हुई है। आज दुनिया भर के लोग हिन्दी फिल्मों के दीवाने है। ये फिल्मी कलाकार फिल्मों के माध्यम से पूरी दुनिया तक पहुंच रहे है। यही नहीं, हालिवुड की हिन्दी में डब फिल्में भी यहां अच्छा-खासा व्यवसाय कर रही है। इनकी लोकप्रियता हिन्दी के माध्यम से निरन्तर बढ़ रही है। बाॅलीवुड ने हिंदी सिनेमा जगत ने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वूपर्ण भूमिका निभाई है। 

विश्व में हिन्दी की लोकप्रियता का एक उदाहरण यह भी है कि आज विश्व के अनेक देशों को रेडियो एवं दूरदर्शन के माध्यम से हिन्दी भाषा में विभिन्न कार्यक्रम एवं समाचार आदि प्रस्तुत किए जा रहे है। इसके लिए आल इंडिया रेडियो ने हिन्दी प्रसारण सेवा शुरू की है। जिसका लाभ विदेशों में रहने वाले करोड़ों हिन्दी प्रेमी उठा रहे है। इसके अलावा विश्व के कई देश रेडियो आदि के माध्यम से हिन्दी में कार्यक्रमों का प्रसारण करते है, जोकि हिन्दी के महत्व व उपयोगिता का परिचायक है।

भारतीय लगभग दो करोड़ लोग विश्व के 132 देशों में रहते है, जो संबंधित देशों में भारत का ही नहीं, बल्कि हिन्दी भाषा का भी प्रतिनिधित्व करते है। इन देशों में बसे भारतीय हिन्दी में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते रहते है। इसके अलावा कई पत्र-पत्रिकाएं भी प्रकाशित की जाती है।

इंटरनेट हिन्दी को अपनाने वाला नया बाजार है। यह हर क्षेत्र में अनिवार्य-सा हो गया है, इसके बगैर कामयाबी की कल्पना तक नहीं की जा सकती। यही नहीं, इंटरनेट पर आज हिन्दी में लिखी सामग्री को आसानी से अपलोड व डाउनलोड भी किया जा सकता है।

आज विश्व में, अंग्रेजी के प्रयोक्ताओं की संख्या बढ़ने की बजाए घट रही है। अपने चर्चित ग्रंथ ‘सभ्यताओं के संघर्ष’ में प्रो. सैम्युअल हन्टिंगटन ने स्पष्ट किया है कि अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन और रूसी बोलने वालों का अनुपात पिछले कुछ दशकों में कम हुआ है। दूसरी ओर, हिंदी, अरबी, बंग्ला, और स्पेनिश आदि बोलने वालों की संख्या बढ़ी है। प्रो॰ हन्टिंगन के अनुसार वर्ष 1958 में दुनिया भर में 9.8 प्रतिशत लोग अंग्रेजी बोलते थे। वर्ष 1997 में यह प्रतिशत गिरकर 7.6 प्रतिशत रह गया। स्पष्ट है कि विश्व में धीरे-धीरे अंग्रेजी के प्रति मोह भंग होता जा रहा है।

बहुत कम लोग इस तथ्य से परिचित हैं कि संयुक्त राष्ट्र की संस्था ‘युनेस्को’ ने स्वीकार किया है कि हिंदी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। ‘युनेस्कों’ की सात मान्यता प्राप्त भाषाओं में हिंदी को स्थान प्राप्त है। भारत के अतिरिक्त लगभग 50 देशों में हिंदी को जानने वाले लोग हैं। 

यह सब जानते है कि भारत विश्व में एक बड़े बाजार के रूप में उभरा है तथा इसकी अर्थव्यवस्था भी काफी मजबूत है। यहां बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आना लाजिमी है तथा कारोबार की सफलता की कुंजी हिन्दी के हाथ में है। इसलिए विभिन्न देशों के उद्यमियों ने हिन्दी के महत्व तथा उपयोगिता को समझते हुए हिन्दी का शिक्षण-प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। हिन्दी का भविष्य उज्ज्वल है तथा यह विश्व की एक सशक्त भाषा है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

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