पर्यावरण संरक्षण के उपाय क्या है?

कोयला और पेट्रोलियम जैसे  ऊर्जा संसाधन तेजी से घट रहे हैं, और एक बार इसके समाप्त हो जाने के बाद, हमें ऊर्जा के किसी अन्य स्रोत पर निर्भर रहना पडेगा। अत्यधिक दोहन और अनियोजित विकास के कारण प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास की समस्या उत्पन्न होती है। एक निश्चित आबादी के आवश्यकताएं पूरी करने के लिए संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। जनसंख्या दबाव के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, पर्यावरण की पुनर्जनन क्षमता की तुलना में तेजी से हो रहा है। 

उदाहरण के लिए, कोयला और पेट्रोलियम के बनने  में बहुत समय लगता है। ये गैर-नवीकरणीय संसाधन भी हैं। इसलिए, हमारे लिए अपने  प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के विभिन्न तरीके हैं। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का केंद्रीय विचार इसका आदर्श या इष्टतम उपयोग है। 

संसाधनों का उपयोग तीन तरीके से किया जाता है जैसे उपयोग कम करने, संसाधनों के पुनः उपयोग और सामग्रियों के पुर्नचक्रण के द्वारा। आम तौर पर, जब पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न होती हैं, तब पर्यावरण प्रबंधक अपव्यय या क्षति को कम करने की योजना बनाते हैं। प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएं प्राकृतिक संसाधनों की गुणवत्ता में निम्नीकरण या गिरावट रही हैं - उदाहरण के लिए, भूमि, मृदा, जल और वायु आदि की प्राकृतिक गुणवत्ता में कमी या गिरावट। साथ ही वन्यजीवों, वनस्पतियों और जीवों को नुकसान पारिस्थितिकी तंत्र में गंभीर व्यवधान की ओर ले जा रहा है। 

प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ये विनाश भूमंडलीय तापन और जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी वैश्विक समस्याओं का कारण बन रहे हैं। पिछले तीन दशकों में हमारे पर्यावरण के संरक्षण के लिए कई प्रयास किए गए हैं।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय

पर्यावरण संरक्षण के उपाय (paryavaran sanrakshan ke upay) हम अपने पर्यावरण की सुरक्षा अग्रलिखित बिन्दुओं के माध्यम से कर सकते हैं -
  1. जैव विविधता को संरक्षण प्रदान करके जनता को जागरूक करना। 
  2. जलीय संसाधनों की सुरक्षा के उपाय करके जनता को जागरूक करना। 
  3. खनीज संसाधनों की सुरक्षा के उपाय करके जनता को जागरूक करना। 
  4. वन विनाश की समस्या से निपटना, भूक्षरण, मरूस्थलीकरण तथा सूखे के बचावों के प्रस्तावों को जनता के समक्ष रखना। 
  5. गरीबी की निवारण तथा पर्यावरणीय क्षति की रोकथाम करके जनता को जागरूक करना। 
  6. विशाक्त धुआँ विसर्जित करने वाले वाहनों पर रोक लगाकर जनता को जागरूक करना। 
  7. पर्यावरण ही सुरक्षा के विषय में जनता को मीटिंग करके बतलाया।
  8. समुद्र तथा सागरीय क्षेत्रों की रक्षा करना एवं जैवीकीय संसाधनों का उचित उपयोग एवं विकास के उपाय बताकर जनता को जागरूकता प्रदान करना। 
  9. जैव तकनीकी तथा जहरीले अपशिष्टों के लिए पर्यावरण संतुलित प्रावधान की व्यवस्था करना। 
  10. पर्यावरण जागरूकता को वैश्विक रूप से प्रदान करना। 
  11. पर्यावरण से संबंधी आंदोलनों को मान्यता प्रदान करना। 
  12. शिक्षा द्वारा जनचेतना पर बल देना। 
  13. शिक्षा द्वारा पर्यावरण के अध्ययन की आवश्यकता पर बल देना। 
  14. पर्यावरण जागरूकता सामाजिक और भौतिक विज्ञानों के अध्ययन पर विशेष बल देना। 
  15. पर्यावरण सुरक्षा हेतु राज्य एवं केन्द्री स्तर पर विशेष प्रावधानों का निर्माण होना चाहिए। 
  16. पर्यावरण सुरक्षा के संबंधित नियम कानूनों को सख्ती से लागू करना। 
  17. समय-समय पर पर्यावरण सुरक्षा हेतु सेमिनार, कार्यशालाओं का आयोजन करना। 
  18. पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित सूचना को सार्वजनिक जागरूकता के माध्यम से सामान्य जनता तक पहुंचाना।
 इस प्रकार उपरोक्त बिन्दुओं के माध्यम से पर्यावरण की सुरक्षा की जा सकती है।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं। मैंने अपनी पुस्तकों के साथ बहुत समय बिताता हूँ। इससे https://www.scotbuzz.org और ब्लॉग की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

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