धुंध (Smog) क्या है, इससे खुद को कैसे बचाएं?

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Smog शब्द दो शब्दों के मेल से बना है Smoke = Fog = Smog धुंध असल में पानी के कणों और धुएं में उपस्थित कार्बन के कणों के मिश्रित होने से बनता है और यह सर्दी के मौसम में अधिक होता है क्योंकि उस समय कोहरे में पानी के कण हवा में होते हैं और कार्बन के कण उनमें मिश्रित हो जाते हैं। धुंध एक तरह का वायुप्रदूषण ही होता है जो (Visibility) दृश्यता को कम कर देता है। धुंध की समस्या उन क्षेत्रों में अधिक होती है जहाँ धुआँ पैदा करने वाले कारखाने लगे होते हैं। जिस कारण प्रदूषण ज्यादा होता है। शहरों में यह समस्या इसलिए अधिक होती है क्योंकि वहां औद्योगिक काम अधिक होता है क्योंकि वहां पर फैक्ट्रियों, गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ, जहरीले कण, राख आदि जब कोहरे के सम्पर्क में आते हैं तो यहाँ से धुँध बनता है।

ऐसे में प्रदूषण के साथ-साथ लोगों को धुँध की समस्या से भी दो चार होना पड़ता है। यह पर्यावरण के साथ-साथ हम मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा नहीं है और आप इसका प्रभाव अगर प्रत्यक्ष देखना चाहते हैं तो दिल्ली में देख सकते हैं जहां प्रदूषण को कम करने के लिए Odd even scheme को लागू किया गया है ताकि प्रदूषण के दुष्प्रभाव को कम किया जा सके। क्योंकि वहां प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि लोगों को सॉस लेने में भी प्रॉब्लम होती है।

बड़े शहरों में वायु प्रदूषण की वजह से धुंध होना आम बात है। लेकिन चाहे आप किसी भी शहर में रहते हों पर फिर भी आपको धुंध से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक होने की जरूरत है। क्या राज्य की सरकारें और क्या आम लोग भी प्रदूषण को गंभीरता से नहीं लेते। वायु प्रदूषण रोजाना नए रिकार्ड बना रहा है।

लेकिन अगर इस तरफ जल्दी ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। ‘‘Smog’’ शब्द कई प्रकार की जलवायु परिस्थितियों के उत्सर्जन का एक मिश्रण है। इनमें ये शामिल हैं -
  1. Industerial Pollution (उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषण) 
  2. Vehicle Pollution (वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण) 
  3. Open Burning (खुले में कूड़ा व अन्य चीजें जलने से)
हमारे देश में अक्सर धुंध सर्दियों के शुरूआत में शुरू होता है लेकिन कई राज्यों जैसे दिल्ली और आसपास के इलाकों में समस्या हमेशा बनी रहती है लेकिन सर्दियों की शुरूआत में इसका असर ज्यादा रहता है।
धुंध में ओजान कण होने से ये ज्यादा खतरनाक हो जाता है। ओजोन एक रंगहीन, गंधहीन गैस है, जब ये ऊपर वायुमंडल में होती है तब तक तो ठीक है, लेकिन जब यह जमीनी स्तर के पास पाई जाती है तब हानिकारक हो सकती है। पृथ्वी के निचले वायुमंडल में ओजोन का होना धुंध के लिए मददगार होता है और जब भी आप सॉस लेते हैं ये आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

धुंध हमारे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है? 

धुंध में मौजूद ओजोन कण होने की वजह से ये हमारे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है :-
  1. स्मोग की चपेट में आने से खॉसी और गले या सीने में जलन : ओजोन का उच्चतर स्तर हमारे श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। वैसे ऐसा आमतौर पर कुछ घंटों के लिए होता है, लेकिन ओजोन कण लक्षणों के होने के बाद भी आपके फेफड़ों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  2. सॉस लेने में तकलीफ : धुंध में जाने पर सांस लेने में तकलीफ हो सकती है क्योंकि धुंध में मौजूद ओजोन हमारे फेफड़ों पर बुरा असर डालते हैं। धुंध का प्रभाव सभी पर एक जैसा नहीं होता। छोटे बच्चे, सीनियर सिटीजन और अस्थमा से पीड़ित लोगों को धुंध होने पर बाहर जाने से बचना चाहिए और जरूरी होने पर मास्क का प्रयोग करना चाहिए। धुंध इंसानों के साथ-साथ जानवरों के लिए भी खतरनाक है यहाँ तक कि इससे पेड़ पौधों को भी नुकसान पहुँचता है। धुंध होने पर ड्राइविंग करने में बहुत परेशानी होती है ना जाने कितने ही एक्सीडेंट का कारण भी धुंध ही बन जाता है। 
  3. बाल तेजी से झड़ सकते हैं धुंध के कारण बालों की समस्या असमय बाल झड़ना, सफेद होना हो सकता है।
  4. ऑखों में एलर्जी का होना धुंध के कारण आँखों में खुजली, सूजन व अन्य रोग हो सकते हैं। 

धुंध से खुद को कैसे बचाएं? 

सबसे पहले तो ये कि जितने ज्यादा लोगों को इसकी जानकारी होगी की धुंध क्या है और इसके क्या प्रभाव हैं तो ज्यादा लोग इससे खुद को बचा पायेंगें। अपने आप को और अपने परिवार को इसके बारें में जानकारी जरूर दें ताकि स्कूल जाने वाले बच्चे और बाहर जाने वाली महिलायें खुद को इससे बचा सकें।

आजकल सरकार की प्रदूषण को लेकर सतर्क हो गयी हैं न्यूज चैनलों में भी इसके बारे में बताया जा रहा है। आजकल मोबाइल एप भी आ गए हैै जो आपके शहर के इलाकों का प्रदूषण लेवल रियल टाइम में बताते रहते हैं। आप इनकी भी मदद ले सकते हैं। स्मोग होने पर वर्कआउट नहीं करना चाहिए। कोई ऐसा कार्य ना करें, जिसमें आपको तेजी से सांस लेना पड़े। घर में चूल्हें, मोमबत्ती या प्रदूषण पैदा करने वाली चीज के पास नहीं बैठना चाहिए।

सावधानियां - 

धुंध होने पर अगर जरूरी नहीं है तो बाहर जाने से बचें। अगर आपको बाहर जाकर दौड़ना या साइकिलिंग करना पड़े तो इन दिनों थोड़ी सावधानी बरतें और हो सके तो सिर्फ सैर करें। इसके अलावा अच्छे मास्क का प्रयोग करें।

हमारे देश में कानून तो है लेकिन इनका सही से पालन नहीं होता। गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, लोग समय पर अक्सर गाड़ियों को ठीक नहीं करवाते। टै्रफिक पुलिस वाले रिश्वत लेकर इन वाहनों को छोड़ देते हैं। केमिकल इंडस्ट्रीज अक्सर केमिकल को खुले में फेंक देती हैं, जिससे वे पर्यावरण को दूषित करते हैं। लोग भी कूड़े और गंदगी को कही भी जला देते हैं। जिससे ये वातावरण में फैल कर धुंध को बढ़ाने का काम करता है।

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