पर्यावरण क्या है?

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पर्यावरण जीवन स्त्रोत हैं जो अनादि काल से पृथ्वी पर मानव एवं सम्पूर्ण जीव जगत को न केवल प्रश्रय देता रहा हें वरन उसे विकसित होने हेतु प्रारंभिक काल से लेकर वर्तमान तक आधार प्रदान कर रहा हैं। भविष्य भी पर्यावरण पर ही निर्भर हैं। विज्ञान की सहायता से मानव प्रकृति पर विजय पाने हेतु अपने प्रयासों में जितना सफल होता रहा हैं पर्यावरण प्रदुषण उसके द्वारा उतना ही बढ़ता रहा आज हमारा भविष्य असुरक्षित होता जा रहा राष्ट्र ग्लोबल वार्मिंग का खतरा मडरा रहा हैं। ओजोन परत का क्षरण, स्कीन समस्यायेंवातानुकूलन यंत्रों से CFC का रिसाव आदि अनेक कारणों से मानव जीवन खतरे में हैं पर मानव अपनी सोच एवं आदतों को बदलने तैयार नहीं हैं। सरकार द्वारा अनेकों अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहें हैं लेकिन वह निषप्रभावी रहते हैं।

लगभग दो दशक पूर्व पर्यावरण के संबंध में चिंता की लहर ने भारत को प्रभावित किया। पर्यावरण शिक्षा के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता अनुभव की गई। एक ओर अंतराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण शिक्षा के लिए व्यापक कार्यक्रम एवं इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों के प्रशिक्षण की आवश्यकता अनुभव की जा रही हैं। वही राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण शिक्षा को पाठ्यक्रम में प्रभावी रूप से सम्मिलित किया गया है। विश्व के नागरिकों को पर्यावरण की रक्षा तथा महत्व तथा उसके प्रदूषण को रोकने की आवश्यकता के संबंध में जागृत करना हैं एवं इस चिंता से सही मुक्ति तभी संभव हैं जब आम जनता में प्रदूषण और उसके दुषपरिणामों के संबंध में पूर्ण जागरूकता पैदा हों जाए और हममें से प्रत्येक पर्यावरण प्रदूषण रोकने में अपनी सक्रिय जिम्मेदारी निभाएं। केवल शासकीय प्रयासों के भरोसें नहीं बैढा जा सकता। क्योंकि प्रदूषण का कारक और शिकार हम में से प्रत्येक व्यक्ति हैं।

पर्यावरण एक व्यापक शब्द हैं पर्यावरण तात्पर्य समूचे भौतिक एवं जैविक विश्व से हैं जिसमें जीवधारी रहते हैं बढते हैं पनपते हैं और अपनी स्वाभाविक प्रकृतियों का विकास करते हैं। समान्यत: पर्यावरण का अभिप्राय मात्र भौतिक या प्रकृति प्रदत्त कारक जैसे भूमि, जल, जलवायु, वनस्पति, खनिज, मुद्रा और जीव जंतुओं से लगा लिया जाता हैं। ओडम के अनुसार-जीवमंडल के भौतिक,रसायानिक व जैविक गुणों के उपर जो हानिकारक प्रभाव पडता है प्रदूषण कहलाता है । विश्व स्वास्थय संगठन के अनुसार-वायुमंडल में अवांछित तत्वों का बढ जाना जिसके कारण मनुष्य तथा उसका पर्यावरण हानिकारक रूप से घातक हो सकता है वायु प्रदूषण कहलाता है

पर्यावरण प्रकार

  1. प्राकृतिक पर्यावरण :- प्राकृतिक पर्यावरण से अभिप्राय हैं जिन पर प्रकृति का सीधा नियंत्रण हैं जिन पर प्रकृति का सीधा नियंत्रण हैं प्राकृतिक पर्यावरण कें अंतर्गत आते हैं:- सूर्य, ताप, ऋतु परिवर्तन, वनस्पति, जीव जंतु ,ज्वाला मुखी, जल, खनिज, भूकम्प, वायु आदि।
  2. भौतिक पर्यावरण - भवन, मार्ग, नगर परिवहन संचार, औधोगिक एवं अति जनसंख्या, व्यापार वाणिज्य आदि। सच तो यह हैं कि जीवन का अस्तित्व मूलत: पर्यावरण पर निर्भर हैं मनुष्य एवं समस्त जीव पर्यावरण से ही अपने जीवन के लिए उपयोगी वस्तुएँ प्राप्त करते हैं। सुनियोजित पर्यावरण के अभाव में अनेक प्रतिकूल एवं हानिकारक प्रभाव परिलक्षित होने लगें हैं। और आज विश्व के अनेक देश पर्यावरण प्रदूषण की चपेट में आ चुके हैं। संसाधनों के अनियंत्रित दोहन विकास की प्रतिस्पर्धा आदि अनेकों कारण मानव जीवन का अस्तित्व खतरे में हैं।

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