पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं तत्व

पर्यावरण का अर्थ

पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों से मिलकर हुआ है - परि आवरण। ‘परि’ का अर्थ है- चारों तरफ से और ‘आवरण’ का अर्थ है- ढँके हुए। इस प्रकार पर्यावरण या वातावरण शब्द का अर्थ हुआ व्यक्ति के आस-पास और चारों ओर जो कुछ भी है, वही उसका पर्यावरण कहा जाता है। मानव के चारों और फैले हुए वातावरण को पर्यावरण की परिधि में माना जाता है। मानव जन्म से मृत्यु पर्यन्त पर्यावरण में ही रहता है। पर्यावरण द्वारा वह वैयक्तिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में विकास करता है। यदि उसे अच्छा वातावरण नहीं दिया जाय तो वह आदर्श मानव के रूप में स्वस्थ नागरिक नहीं बन सकता। व्यक्ति को चारों ओर से ढंकने वाला आवरण ही ‘पर्यावरण’ कहलाता है। इसके अभाव में सुखद जीवन ही असम्भव है।

पर्यावरण का अर्थ 

पर्यावरण शब्द परि + आवरण से मिलकर बना है परि का अर्थ है चारों ओर और आवरण का अर्थ है घिरा हुआ। अर्थात पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है चारों ओर से घिरा हुआ । जैसे नदी ,पहाड़, तालाब, मैदान, पेड़-पौधे, जीव-जंतु वायु वन मिट्टी आदि सभी हमारे पर्यावरण के घटक है। हम सभी इन घटको का दैनिक जीवन में भरपूर उपयोग करते है अर्थात हम इन घटको पर ही निर्भर है।

पर्यावरण की परिभाषा

पर्यावरण की परिभाषा इस प्रकार है -

1. जे.एस. रॉस के अनुसार-
“ पर्यावरण या वातावरण वह वाह्य शक्ति है जो हमें प्रभावित करती हैं।”

2. डगलस एंव हालैण्ड के अनुसार- “ पर्यावरण वह शब्द है जो समस्त वाह्य शक्तियों ,प्रभावों और परिथतियों का सामूहिक रूप से वर्णन करता है जो जीवधारी के जीवन ,स्वभाव ,व्यवहार तथा अभिवृद्धि , विकास तथा प्रौढता पर प्रभाव डालता है ।”

3. हर्स, कोकवट्स के अनुसार- “ पर्यावरण इन सभी बाहरी दशाओं और प्रभावों का योग है तो प्राणी के जीवन तथा विकास पर प्रभाव डालता है।”

4. डॉ डेविज के अनुसार- “ मनुष्य के सम्बन्ध में पर्यावरण से अभिप्राय भूतल पर मानव के चारों ओर फैले उन सभी भौतिक स्वरूपों से है। जिसके वह निरन्तर प्रभावित होते रहते हैं।”

5. डडले स्टेम्प के अनुसार- “ पर्यावरण प्रभावों का ऐसा योग है जो किसी जीव के विकास एंव प्रकृति को परिस्थितियों के सम्पूर्ण तथ्य आपसी सामंजस्य से वातावरण बनाते हैं।”

6. ए.बी.सक्सेना के अनुसार- “ पर्यावरण शिक्षा वह प्रक्रिया है जो पर्यावरण के बार में हमें संचेतना, ज्ञान और समझ देती है । इसके बारे में अनुकूल दृष्टिकोण का विकास करती है और इसके संरक्षण तथा सुधार की दिशा में हमे प्रतिबद्ध करती हैं।”

7. शिक्षाशास्त्री टॉमसन के अनुसार- “ पर्यावरण ही शिक्षक है शिक्षा का काम छात्र को उसके अनुकूल बनाना हैं।”

8. विश्व शब्दकोश के अनुसार- “ पर्यावरण उन सभी दशाओं, प्रणालियों तथा प्रभावों का योग है जो जीवों व उनकी प्रजातियों के विकास जीवन एंव मृत्यु को प्रभावित करता हैं।”

9. हर्सकोविट्ज के अनुसार - “ जो तथ्य मानव के जीवन और विकास को प्रभावित करजे है उस सम्पूर्ण तथ्यों का योग पर्यावरण कहलाता है भले ही वे तथ्य सजीव हो अथवा निर्जीव ।”

10.जर्मन वैज्ञानिक फिटिगं के अनुसार “ पर्यावरण जीवों के परिवृत्तिय कारकों का योग है । इसमें जीवन की परिस्थितियों के सम्पूर्ण तथ्य आपसी सामंजस्य से वातावरण बनाते हैं।”
 
11. विश्व के लिए शिक्षा मूनस्को यूरोप के अनुसार- “ पर्यावरण शिक्षा के विषय क्षेत्र अन्य पाठ्यक्रमों की तुलना में कम परिभाषित है । फिर भी यह सर्वमान्य है कि जैविक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय संसाधनों से सामग्री प्राप्त होती हों । इस शिक्षा के लिए संप्रत्यात्मक विधि सर्वोत्तम हैं।”

12. निकोलर्स के अनुसार- “ पर्यावरण उन समस्त बाहरी दशाओं तथा प्रभावों का योग है जो प्रत्येक प्राणी के जीवन विकास पर प्रभाव डालते है “

13. सी.सी. पार्क के अनुसार- “ मनुष्य एक विशेष समय पर जिस सम्पूर्ण परिस्थितियों से धिरा हुआ है उसे पर्यावरण या वातावरण कहा जाता है। “

उपर्युक्त परिभाषाओं के अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि जो कुछ भी हमारे चारों ओर विद्यमान है तथा यह हमारी रहन-सहन दषाओं तथा मानसिक क्षमताओं को प्रभावित करता है, पर्यावरण कहलाता है। पर्यावरण में वे सभी परिस्थितियाँ भी आती हैं, जो हमारे जीवन पर प्रभाव डालती हैं। हमारा घर, मौहल्ला, गाँव, शहर सभी हमारे पर्यावरण के अंग हैं क्योंकि वे सभी हमारे जीवन पर प्रभाव डालते हैं। ‘पर्यावरण’ मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समाविष्ट हैं।

पर्यावरण एक व्यापक शब्द है। यह उन संपूर्ण शक्तियों, परिस्थितियों एवं वस्तुओं का योग है जो मानव को परावृत करती है तथा उसके क्रियाकलापों को अनुषासित करती है।

पर्यावरण के प्रकार

वर्तमान समय में मनुष्य प्रदूषण के प्रकार स्वयं प्रदूषण का स्त्रोत है, क्योंकि प्रकृति में कोई भी ऐसी विधि नहीं पाई जाती है जो कि मनुष्य के द्वारा निर्मित पदार्थों को अपघटित कर सके, और उन तत्वों को प्रकृति के चक्र में कर देवें। यह पदार्थ इसी रूप में पाये जाते हैं और जो भी वह क्षति पहुँचाना चाहते हैं, वह क्षति पहुँचा देते हैं या हानि उत्पन्न कर देते हैं, जब तक कि वह विस्तारित या तनुकृत न हो जावे अतः प्रदूषण निम्न प्रकार के होते हैं - 
  1. वायु प्रदूषण, 
  2. जल प्रदूषण 
  3. मिट्टी/मृदा प्रदूषण 
  4. समुद्री प्रदूषण 
  5. ध्वनि प्रदूषण 
  6. तापीय प्रदूषण 
  7. आणविकीय संकट
  8. जैव प्रदूषण 
  9. ठोस अपषिष्ट प्रदूषण।

पर्यावरण के अंग

1. स्थल मण्डल (lithosphere)- जल -तल से ऊँचा उठा हुआ भाग स्थल मण्डल है और इसके अन्तर्गत धरातल का लगभग 29 प्रतिशत भाग आता है । इस स्थल में तीन परतें है । पहली परत भू-पृष्ठ की है और धरती से इस परत की गहराई 100 कि.मी. है। इस परत में विभिन्न प्रकार की मिट्टियॉ व शैलें समाई हुई है। इस भाग का औसत धनत्व 2.7 है । 

दूसरी परत को उपाचयमण्डल कहते है, जिसकी गहराई स्थल मण्डल के नीचे 200 कि.मी. तक है तथा जिसमें सिलिकन और मैगनीशियम की प्रधानता है और इसका औसत धनत्व 3.5 ऑका गया है।  तीसरी परत को परिणाम मण्डल कहते है, जो पृथ्वी का केन्द्रीय मण्डल है और कठोर धातुओं से बना हुआ है, जिसमें निकल व लोहे की प्रधानता है । 
2. जल मण्डल (hydrosphere)- पृथ्वी का समस्त जलीय भाग जलमण्डल कहलाता है , जिसमें सभी सागर व महासागर सम्मिलित है । भूपटल के 71% भाग पर जल एंव 29 % भाग पर थल का विस्तार है। पृथ्वी की समह पर क्षेत्रफल लगभग 51 करोंड वर्ग किलोमीटर है। जिसमें 36 करोंड वर्ग कि.मी. पर जल का विस्तार है। 

3. वायु मण्डल (Atmosphere)- पृथ्वी के चारों ओर वायु का सैकडों किमी. मोटा आवरण है, जिसे वायुमण्डल कहा जाता है। पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण वायु का यह धेरा पृथ्वी को जकड़े हुए है, और धरातल से इसकी ऊंचाई साधारणतः 800 किलोमीटर मानी जाती है, परन्तु खोज के पश्चात यह ऊंचाई 1300 किलोमीटर ऑकी गयी है। वायु मण्डल में भी अनेक परत होती है।

पर्यावरण के तत्व

पर्यावरण के तत्वों को दो समूहों में विभक्त किया जाता है। (अ) अजैव तत्व (Abiotic Elements) तथा (ब) जैव तत्व (Biotic Elements)। अजैव तत्वों में जलवायु, स्थल, जल, मृदा, खनिज एवं चट्टान तथा भौगोलिक स्थिति प्रमुख है। जैव तत्वों में पौधे और जीव-जन्तु प्रमुख है।

1. अजैव तत्व समूह 

  1. जलवायविक कारक (Climatic Factors)- सूर्य, प्रकाश एवं ऊर्जा, तापमान, हवा, वर्षा, आर्द्रता, वायुमण्डलीय गैस आदि।
  2. स्थलजात कारक (Topographic Factors)- उच्चावच, ढाल, पर्वत, दिषा आदि।
  3. जल स्रोत (Water Bodies)- सागर, झील, नदी, भूमिगत जल आदि।
  4. मृदा (Soils)- मृदा रूप, मृदा-जल, मृदा-वायु आदि।
  5. खनिज एवं चट्टानें (Rocks and Minerals)- धात्विक एवं अधात्विक खनिज, ऊर्जा खनिज एवं चट्टानें।
  6. भौगोलिक स्थिति (Geographical Locations)- तटीय, मध्यदेषीय, पर्वतीय आदि।

2. जैव-तत्व समूह

इसमें वनस्पति, जीव-जन्तु, मानव एवं सूक्ष्म जीव आते है। पर्यावरण के जैव एवं अजैव तत्व समूह अपनी विशेषता के अनुसार पर्यावरण का निर्माण करते हैं। चूंकि ये आपस में गुंथे हुए हैं अत: इनमें होने वाले परितर्वनों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। 

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

9 Comments

  1. बहुत अच्छी जानकारी देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपका दिन शुभ हो जय हिंद जय भारत वंदे मातरम

    ReplyDelete
  2. बहुत अच्छी जानकारी आपने उपलब्ध करायी ।
    ... धन्यवाद

    ReplyDelete
  3. क्या परिभाषाओं का सन्दर्भ प्राप्त हो सकता है?

    ReplyDelete
  4. कतई हरामी हो रहे हो ������

    ReplyDelete
  5. Bhut achi jaankari di h aap ne thank🙏🙏

    ReplyDelete
  6. इस जानकारी को देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

    ReplyDelete
Previous Post Next Post