दूरस्थ शिक्षा का ऐतिहासिक विकास

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अनुक्रम

दूरस्थ शिक्षा का उद्भव 

पत्राचार के रूप में दूरस्थ शिक्षा का इतिहास 1840 से मानी जाती है।
आधुनिक नवीन प्रणाली का प्रारम्भिक रूप ‘‘ओल्ड टैसटामन’’ के अनुदेशनात्मक लेखों
से मिलता है, इसके अतिरिक्त आम धारणा के अनुसार इसका प्रारम्भ 1840 ई0 में
आइजक पिटमैन द्वारा शार्ट हैण्ड पाठ्यक्रम पेनी डॉक से भेजने से हुआ है। 1856 में
लैगनशीट एवं टॉसैन्ट ने एक आधुनिक भाषाओं के स्कूल की स्थापना करके विदेशी
भाषाओं का शिक्षण पत्राचार से प्रारम्भ किया। संयुक्त राज्य अमेरिका के औपचारिक
माध्यमिक विद्यालयों में पत्राचार शिक्षा की भूमिका 1873 में प्रारम्भ हो गयी पर
विश्वविद्यालय में यह पाठ्यक्रम 1890 ई0 में प्रारम्भ हुआ पर यह अत्यल्प थी।

यूरोप देशों में सन् 1890 में जर्मनी व स्वीडन में पत्राचार शिक्षा संस्थानों की
स्थापना हुयी। परन्तु बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ तक पत्राचार अनुदेशन विद्यालयों की
स्थापना बहुत अधिक हो चुकी थी।

दूरस्थ शब्द की उत्पत्ति – 

दूरस्थ शिक्षा पहले डाक शिक्षण, पत्राचार पाठ्यक्रम, स्वतंत्र अध्ययन, गृह अध्
ययन जैसे शब्दों से जानी जाती थी। परन्तु अनेक नामों के बीच पत्राचार शिक्षा ही
सर्वाधिक लोकप्रिय हुयी। वैसे सभी नामों में समानता है और सभी में गैर परम्परागत
और सभी में मुद्रित सामग्री, संचार माध्यमों के माध्यम से शिक्षक-शिक्षाथ्र्ाी के मध्य
सम्बंध स्थापना का कार्य किया जाता है और फिर इसे मुक्त विश्वविद्यालय, दूर
विश्वविद्यालय आदि नाम प्रदान किये गये।

फिर कुछ समय बाद ‘‘पत्राचार शिक्षा’’ नाम के प्रति लोगों में भ्रम उत्पन्न हुआ
और यह माना गया कि यह नाम शिक्षा की प्रकृति के अनुरूप नहीं है। अत: इस संदेह
को समाप्त करने का अवसर मिल गया जब 1982 में बैकाउर में प्रो0 बख्सीश सिंह की
अध्यक्षता में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय पत्राचार शिक्षा परिषद् के बारहवें विश्व सम्मेलन में
इण्टरनेशनल काउन्सिल फार करस्पाण्डेन्स को बदलकर इण्टरनेशनल काउन्सिल फॉर
डिस्टैन्स एजुकेशन कर दिया गया। नाम बदलने का कारण मुख्य रूप से प्रकृति ही
थी क्योंकि पत्राचार शिक्षा में मूलत: मुद्रित सामग्री दी जाती थी, जिसमें स्व अनुदेशन
जैसे तथ्य नहीं थे और दूरस्थ शिक्षा सूचना प्रसारण के बहु-माध्यम उपागम की ओर
संकेत करता है।

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दूरस्थ शिक्षा- 

दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता एवं लोकप्रियता ने इससे जुडे लोगों को
प्रोत्साहन दिया इसके ही फलस्वरूप 1938 में अन्तर्राष्ट्रीय पत्राचार शिक्षा परिषद्
(आई0सी0सी0ई) की स्थापना की गयी इसके संस्थापक अध्यक्ष जे0डब्लू0 गिबसन रहे।
सन् 1938 को इसका प्रथम सम्मेलन आयोजित किया गया और आर0सी0हाइट को
प्रथम अध्यक्ष चुना गया तथा द्वितीय सम्मेलन सन् 1948 में आयोजित हुआ जिसमें
नेबरास्का विश्वविद्यालय के एक्सटेंसन डिवीजन के निदेशक डा0 ब्रौडी अध्यक्ष बने। सन्
1967 में यूनेस्को के अन्तर्राष्ट्रीय पत्राचार शिक्षा परिषद् को अशासकीय संस्था के रूप
में मान्यता मिली।

इसी बीच यूनाइटेड किंगडम में 1969 में श्रम प्रधान मंत्री हारनोल्ड विलसन के
प्रयासों से मिल्टन कीन्स में प्रथम मुक्त विश्वविद्यालय खुला। यह दूरस्थ शिक्षा के लिये
स्वर्णिम अवसर था। सन् 1972 में नौवे अन्तर्राष्ट्रीय पत्राचार शिक्षा परिषद् के सम्मेलन
से पूर्व ही डॉ0 चाल्र्स ए0 वेडेमियर ने इस पर एक समाचार-पत्र निकालकर जागरूकता
उत्पन्न करना प्रारम्भ किया। 1978 में आई0सी0सी0ई0 का विश्व सम्मेलन आयोजित
करने वाला भारत प्रथम विकासशील देश था। 1982 तक इस संस्था के सदस्य देशों की
संस्था बढ़कर 60 हो गयी थी।

आस्टे्रलिया दूरस्थ शिक्षा में अत्यधिक आगे है, क्योंकि यह कई द्वीपों मे बांटा
हुआ है और सम्पूर्ण जनसंख्या बिखरी है। इस स्थिति में औपचारिक शिक्षा बहुत सफल
नही हो पा रही है। आस्टे्रलिया प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च स्तर पर पत्राचार शिक्षा
प्रदान करने का अनुभव रखता है। क्वीन्सलैण्ड नामक विश्वविद्यालय सन् 1911 से ही
पत्राचार शिक्षा की सुविधा प्रदान कर रहा है। आस्टे्रलिया में पत्राचार शिक्षा व्यवस्था
बहुत अच्छी चल रही है, क्योंकि विश्वविद्यालय शिक्षक परिसर में ही नियमित छात्रों का
शिक्षण कर बाद में पत्राचार पाठ्यक्रमों का भी शिक्षण परिसर में ही करते हैं।

यूरोपीय देशो में दूरस्थ शिक्षा 

यूरोपीय देशों र्इंग्लैण्ड, पश्चिमी-पूर्वी जर्मनी, नार्वे, नीदरलैण्ड, स्पेन आदि में
बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में दूरस्थ शिक्षा का तीव्रतम विकास हुआ। यहां पर उन्नत
शैक्षिक तकनीकी प्रचार-प्रसार का मुख्य कारण रही। सर्व प्रथम 1968ई0 में यूरोपीयन
होम स्टडी काउन्सिल की स्थापना की गयी, इसने इस प्रणाली पर शोध कार्य करना
प्रारम्भ किया तथा प्रबंध के विकास कार्यक्रम पर ध्यान देते हुये ‘‘इपिस्टोलोडिडेकटिका’’
का प्रकाशन प्रारम्भ किया। बाद में यूरोपीय पत्राचार विद्यालय संघ की स्थापना हुई
जिसमें 17 यूरोपीय देशों के लोग सदस्य बने। 1978 में सूचना एवं संसाधन इकाई की
स्थापना की गयी। यह इकाई अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सेवा हेतु मुक्त विश्वविद्यालय
केन्द्र को सहायता प्रदान करती है, और अब यह इकाई यूनाइटेड नेशन्स ‘‘यूनीवर्सिटी
इण्टरनेशनल डाक्यूमेन्टेशन सेन्टर ऑन डिस्टेन्स एजुकेशन’’ के रूप में प्रस्थापित हुयी।

ईग्लैण्ड में मिल्टर कीन्स द्वारा 1969 में मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना से
दूरस्थ शिक्षा के विकास का कार्य प्रारम्भ हुआ। इस विश्वविद्यालय में साठ हजार से
अधिक शिक्षाथ्र्ाी नामांकित है, इसने अनेक देशों को दूरस्थ शिक्षा केन्द्र के स्थापना हेतु
विशेषज्ञ प्रदान किये हैं। ईग्लैण्ड के मुक्त विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम ने अनेक देशों
को प्रेरित किया है। केम्ब्रिज का इन्टरनेशनल एक्सटेशन कालेज भी दूरस्थ शिक्षा प्रदान
करने की प्रमुख संस्था है। ईग्लैंण्ड में पत्राचार संस्थान के व्यक्तिगत प्रयास भी
सराहनीय है।

पश्चिमी जर्मनी- 

पश्चिमी जर्मनी में भी पत्राचार विद्यालय बहतु ही लाके पिय्र
है। सर्वप्रथम आवश्यकता को ध्यान में रखते हुये 1965 ई0 में टयूबिन्गन में जर्मन दूरस्थ
शिक्षा संस्था की स्थापना हुई। यह संस्थान राष्ट्र स्तर का है, और यह उच्च शिक्षा एवं
भावी अधिगम की संस्थाओं को मुद्रित एवं श्रव्य दृश्य अध्ययन सामग्री प्रदान कर रही
है। बाद में 1974 ई0 में हेगन में एक दूरस्थ शिक्षण विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
पश्चिमी जर्मनी अफ्रीकी देशों में दूरस्थ शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर रहा है।

पूर्व जर्मनी-

पूर्व जर्मनी में 1976 ई0 से सामाजिक विकास का प्रारम्भ हुआ।
दूसरे देशों की भांति कार्यरत व्यक्ति दूरस्थ शिक्षा एवं सायंकालीन कालेजों के माध्यम
से तकनीकी शिक्षा की डिग्रियां प्राप्त करने की ओर प्रवश्त्त हुये। अनेक क्षेत्रो में दूरस्थ
शिक्षा के कोर्स प्रारम्भ हुय। उच्च शिक्षा मंत्रालय के अन्तर्गत ‘‘विश्वविद्यालय दूरवर्ती
शिक्षा का केन्द्रीय कार्यालय के द्वारा दूरस्थ शिक्षा का उत्तरदायित्व भी संभाला जाता
है।

फ्रांस- 

फ्रासं में दूरस्थ शिक्षा के प्रचार-प्रसार हते ु शिक्षको के लिये दूरस्थ
विश्वविद्यालय शिक्षण की व्यवस्था किया गया। बाद में इसका क्षेत्र विस्तृत हो गया और
18 विश्वविद्यालयों को ‘रेडियो विश्वविद्यालय’ का नाम दिया गया। इनके द्वारा 3 एवं
4 वर्ष की अवधि के विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम चलाये जाते हैं। फ्रांस में दूरस्थ
शिक्षा ने अपने पाठ्यक्रम इतने विकसित किये कि अनेक देश उससे पाठ्यसामग्री
आदान-प्रदान करते हैं। 1907 ई0 से इकोल विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा के अनेक
पाठ्यक्रम संचालित करता है।

नीदरलैण्ड- 

डच सरकार ने भी दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता को स्वीकार
किया और 1971 ई0 में डच सरकार में इसे लचीली बनाने पर जोर दिया। 1984 ई0
में नीदरलैण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना हुई, जिसमें आधिकारिक विधि, सांस्कश्तिक
विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, विपणन, साख्यिकी एवं प्रणाली प्रबंधन
आदि सम्बंधित पाठ्यक्रम संचालित है। डच भाषी लोगों के लिये भी इसका एक केन्द्र
वेल्जियम में प्रस्थापित है।

इटली- 

इस देश में दूरस्थ शिक्षा का विश्वविद्यालय ‘‘कानसारे जिओ पर ल
यूनिवर्सिटी ए डिटैन्जा’’ स्थापित किया गया है।

नार्वे- 

इस देश में 1948 ई0 में नार्व े सरकार ने पूरे देश में पत्राचार शिक्षा के
प्रचार हेतु कानून पारित किया गया। सरकार को दूरस्थ शिक्षा पर परामर्श देने के लिये
एक सरकारी संस्था- ‘‘पत्राचार शिक्षा परिषद्’’ की स्थापना भी की गयी है। नार्वेइयन
पत्राचार विद्यालय संघ की स्थापना की गयी और उन्होनें 1965ई0 में नाम बदलकर
नार्वेइयन दूरस्थ शिक्षा संघ कर दिया।

स्पेन- 

इस देश ने 1973 ई0 ‘‘राष्ट्रीय दूरस्थ शिक्षा विद्यालय की स्थापना कर
दूरस्थ शिक्षा को अति लोकप्रिय बनाया। इस विश्वविद्यालय में व्यापक स्तर पर दूरस्थ
शिक्षा से सम्बंधित विभिन्न पाठ्यक्रम चलाये जाते हैं।

स्वीडन- 

स्वीडन में सबसे पहला पत्राचार विद्यालय 1898 में हरमॉड्स ने
प्रारम्भ किया। इसके पश्चात् अनेक पत्राचार विद्यालय खुले। स्वीडिस सेना के लोगों की
शिक्षा के लिये एक पत्राचार विद्यालय खोला गया। 1966 मे एक अन्य विद्यालय खुला,
यह ‘लिबर हारमॉडस’ के नाम से प्रसिद्ध संस्था है। सन् 1968 ई0 में स्वीडिस
विश्वविद्यालयों नें सांध्यकालीन कक्षाओं एवं स्थानीय बाह्य पाठ्यक्रम जैसे पूरक
अध्ययन पाठ्यक्रमों को दूरवर्ती शिक्षा के द्वारा आरम्भ किया। यहॉ पर भी तकनीकी
शिक्षा के पाठ्यक्रमों के प्रति विद्याथ्र्ाी दूरस्थ शिक्षा की ओर अधिक आकृष्ट होते हैं।

सोवियत संघ- 

रूस में 1920 ई तक एक बहुत बडी़ सख्ं या मे लो ग अशिक्षित
थे। रूस में शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने के लिये पत्राचार पाठ्यक्रमों का
सहारा लिया और विशेष अभियान मे रूस ने दो दशकों में ही पूर्ण साक्षरता प्राप्त कर
ली। इसमें सबसे अधिक प्रौढ़ शिक्षा का विकास महत्वपूर्ण रहा। रूस ने आगे चलकर
औपचारिक शिक्षा के तीन रूप पूर्णकालिक, सांध्य या अल्प कालिक तथा पत्राचार
पाठ्यक्रम अपनाया। यहां पर पत्राचार शिक्षा की पाठ्यवस्तु एवं पाठ्यक्रम को केन्द्रिय
स्तर पर संगठित किया गया। विभिन्न गणतंत्र देश इसे अपनी आवश्यकता के अनुरूप
ही अनुवाद कर पूरक सामग्री के रूप में प्रयोग में ला रहे हैं।

सोवियत संघ में इस समय 500 से अधिक पत्राचार संकाय विश्वविद्यालयों से
सम्बद्ध हैं, और औपचारिक शिक्षा के लगभग बराबर संख्या ही इस पत्राचार माध्यम के
विद्यार्थियों का भी हैं यहां पर औपचारिक शिक्षा के समकक्ष दूरस्थ शिक्षा को महत्व दिया
जाता है।

अफ्रीकी देशों में दूरस्थ शिक्षा

 भारत की ही तरह अफ्रीकी देश भी लम्बे समय तक उपनिवेशावाद से प्रभावित
रहे और साक्षरता दर वहां भी न्यूनतम थी। स्वतंत्रता के प्श्चात् सभी ने शिक्षा की ओर
ध्यान दिया और इसके साथ ही प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी सामने आ गयी तथा
कार्यरत अध्यापकों के प्रशिक्षण हेतु दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था का सहारा लिया और अनेक
देश घाना, नाइजिरिया, तनजानिया, केन्या, बोटस्वाना, लिसार्थो, स्वाजीलैण्ड, गुयाना,
इथोपिया आदि ने दूरस्थ शिक्षा के पाठ्यक्रमों को आयोजित किया। सर्वप्रथम प्रारम्भ
मुद्रित सामग्री से हुआ बाद में जनसंचार के माध्यमों ने इसे अधिक लोकप्रिय बनाया।
अफ्रीका में 1962 में पहला पत्राचार विद्यालय ब्राजाविले में स्थापित हुआ। इसके
अतिरिक्त पत्राचार शिक्षा में बोत्सवाना, लिसार्थो एवं स्वीजीलैण्ड ने आपस में मिलकर
काम करना प्रारम्भ किया है।
इसके अतिरिक्त, साउथ वेस्ट अफ्रीकॉज़ पिपुल आरगनाइजेशन अंगोला व
जाम्बिया के शरणार्थियों की शिक्षा के लिये उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।
अफ्रीका दूरस्थ शिक्षा में गुणवत्ता हेतु भी प्रयासरत है, इसके लिये अन्तर्राष्ट्रीय
सेमिनार, सम्मेलन एवं कार्यशालाओं के आयोजन हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ से मदद भी लेता
है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक इकाई अफ्रीका ने आदिस अबाबा में एक दूरस्थ शिक्षा की
इकाई खोली है।

अफ्रीकी देशो में साक्षरता दर में वश्द्धि हेतु औपचारिक शिक्षा माध्यम के
अतिरिक्त दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों को भी प्रचुर महत्व दिया है। सन् 1983 मे ंनाईजिरिया
में एक मुक्त विश्वविद्यालय खुला। अफ्रीकी देश पत्राचार शिक्षा एवं दूरस्थ शिक्षा को
शिक्षा प्रदान करने का आधार बना रहे हैं।

एशिया में दूरस्थ शिक्षा का प्रसार- 

डपनिवेशवाद के प्रभाव में एशिया के कई देश रहे और स्वतंतत्रता के पश्चात्
सभी के सामने शिक्षा में पिछड़ापन और प्रशिक्षित अध्यापकों की आवश्यकता ही सबसे
बड़ा चुनौती थी, अत: एशियाई देशों में दूरस्थ शिक्षा की आशातीत प्रगति हो रही है, और
इसे हम अलग-अलग देशो को पृथक रूप में देखेंगे।

चीन- 

यह विश्व का सबसे अधिक जनसख्ंया वाला देश है, और इसने बीसवीं
सदी में ही अपनी जनसंख्या को शिक्षित करने हेतु दूरस्थ शिक्षा को अपना लिया था,
पर इसका अध्याधिक प्रचार-प्रसार, साठ के दशक में हुआ। इसी समय बीजिंग,
शंधाई, शियांग में टी0वी0 विश्वविद्यालय स्थापित हुये। इन विश्वविद्यालयों ने प्रौढ़ शिक्षा
को सुधारना प्रारम्भ किया। 1979 ई0 में बीजिंग में सेन्ट्रल रेडियो तथा टेलीविजन
यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई यह दूरस्थ शिक्षा के प्रचार-प्रसार हेतु बहुत बड़ी संख्या
में दूर शिक्षण कर रहा है। इस विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश तथा
अनुदेशन का मुख्य आधार टेलीविजन तथा लिखित मुद्रित सामग्री तथा सम्पर्क
कार्यक्रमों के द्वारा इसे सशक्त बनाया जाता है। इस समय देश भर में करीब 30 से
अधिक क्षेत्रीय टी0वी0 विश्वविद्यालयों द्वारा प्रतिवर्ष लाखों विद्यार्थियों केा डिग्रियां प्रदान
की जाती हैं।

जापान- 

यह एक विकसित देश है, जिसमें लम्बे समय के परतत्रंता के
पश्चात् विश्व में अपने आपको सिद्ध किया। यहां पर पत्राचार शिक्षा नियमित
विश्वविद्यालय द्वारा नियमित छात्रों के लिये बनाये गये पाठ्यक्रम से ही प्रदान की जाती
है। यह मूल संकल्प का ही एक भाग होती है। स्कूलों में भी पत्राचार पाठ्यक्रमों को
दिया गया है। उच्च माध्यमिक विद्यालयों ने भी पत्राचार शिक्षा में अपना संगठन बना
रखा है। विश्वविद्यालय स्तर पर पत्राचार पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षा होती हैं।
जापान ने ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन के रेडियो एवं दूरदर्शन पर प्रचारित ‘‘विश्वविद्यालय
पत्राचार व्याख्यान’’ का प्रयोग करने हेतु सुविधा दी है। 1980 ई0 के पश्चात् पत्राचार
शिक्षा महिलाओं के शैक्षिक स्तर को ऊँचा उठाने हेतु बहुत लोकप्रिय हुआ। 1985 ई0
के बीच जापान में एक हवाई विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी।

पाकिस्तान- 

पाकिस्तान में 1974 में अल्लामा इकबाल मुक्त विश्वविद्यालय की
स्थापना हुई। यह विश्वविद्यालय सभी स्तर की शिक्षा प्रदान करने हेतु प्रयासरत है, यह
देश भर में साक्षरता कार्यक्रम से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक के अनेक कार्यक्रम संचालित
करता है। इस विश्वविद्यालय ने एकीकश्त कार्यात्मक शिक्षा कार्यक्रम नामक प्रभावी
कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिये चलाया है।

इण्डोनेशिया- 

इण्डोनेशिया में सर्वप्रथम मुक्त विश्वविद्यालय 1984 ई0
खुला। इसने उच्च शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिये कार्य करना प्रारम्भ किया।
इसने अनुदेशसनात्मक सामग्री को प्रसारित करने हेतु जनसंचार माध्यमों का सहारा
लिया।

कोरिया- 

कोरिया में 1980 ई0 में गैर मान्यता प्राप्त एवं डिग्री रहित
पाठ्यक्रमों के रूप में पत्राचार शिक्षा की शुरूआत हुई। सन् 1972 ई0 में सियोल नेशनल
यूनिवर्सिटी ने अपने यहां पत्राचार शिक्षा विभाग स्थापित किया। 1982 ई0 में यह मुक्त
विश्वविद्यालय के रूप में कोरिया एअर एवं कारेस्पोन्डेन्स यूनीवर्सिटी के नाम से प्रसिद्ध
हुआ। इसमें कई शैक्षिक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित है।

फिलिपिन्स- 

फिलिपिन्स मे भी कई देशा ें की तरह 1976 ई0 में शिक्षकों को
प्रशिक्षित करने के लिये दूरस्थ शिक्षा का प्रारम्भ किया गया। फिलिपिन्स में पाठ्य
सामग्री के निर्माण पर विशेष जोर दिया जाता है, इसे जन उपयोगी बनाने हेतु पूरा
प्रयास किया जाता है। पाठ्यक्रम को आवश्यकता के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।
इसमें समाजोपयोगी गृह उद्योग, पर्यावरण, नियोजन, घरेलू पशुपालन, घरेलू खेती से
सम्बंधित पाठ्यक्रम सम्मिलित है। इसे स्वत: प्रगति प्रणाली उन्मुख बनाया गया है।

थाईलैण्ड-

थाईलैण्ड में बैकाक में सन् 1978 ई0 में सुखोथाई थम्मियिरत
विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। नामांकन संख्या की दृष्टि से यह विश्व का सबसे बड़ा
मुक्त विश्वविद्यालय है। यह स्नातक, अल्पकालिक व्यवसायिक दक्षता सम्बर्धन पाठ्यक्रम
तथा आधारभूत ग्रामीण विकास पाठ्यक्रम संचालित करता है। इसने अपनी अनुदेशनात्मक
सामग्री को जन-जन तक पहॅुचाने हेतु 75 प्रान्तों मे सार्वजनिक पुस्तकालयों में अपनी
पश्थक पुस्तकालय व्यवस्थित की है। यह विभिन्न व्यवसायों को प्रशिक्षित कार्मिक वर्ग
प्रदान कर रहा है।

मलेशिया- 

मलेशिया के पिनॉग शहर में युनिवर्सिटी सैन्स मलेशिया खोला
गया है। यह शिक्षा के सार्वजनिकरण हेतु अनेक पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है,
मलेशिया में व्यक्तिगत पत्राचार संस्थायें भी कार्यरत है, यह स्कूल स्तर पर वाणिज्यिक
एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं।

श्रीलंका- 

श्रीलकां ने एक्सटरनल सविर्स ऐजन्सी श्रमिक शिक्षा सस्ंथान तथा
श्रीलंका दूरस्थ शिक्षा संस्थान संचालित किया है। इनके प्रयास से सन् 1980ई में भी
लंका में मुक्त विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।

दूरस्थ शिक्षा हेतु भारत में नीतिगत प्रयास – 

भारत में साठ के दशक मे भारत सरकार की नीतियां दूरस्थ शिक्षा की ओर
उन्मुख हुई। उच्च शिक्षा के विस्तार एवं प्रसार के आवश्यकता ने योजना अयोग को
इस ओर सोचने के लिये विवश किया। 1960 में एक सामान्य अध्यादेश में यह निकाला
गया कि उच्च शिक्षा की सुविधा को बढ़ाने के दिशा में सांध्यकालीन कालेज, पत्राचार
पाठ्यक्रम बाह्य उपाधि मान्यता दिये जाने के उपक्रम है।

भारत में पत्राचार शिक्षा के सूत्रपात करने का श्रेय तत्कालीन शिक्षामंत्री
डा0के0ए0श्रीमाली को है। उन्होनें उच्च शिक्षा की बढ़ती मांग को एवं प्रौढ़ शिक्षा
कार्यक्रमों को प्रभावशाली बनाने की आवश्यकता को अनुभव किया तब वे विदेशों में
सफल पत्राचार पाठ्यक्रमों की ओर आकर्षित हुए।

केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार परिषद् ने इस पर विस्तार से अध्ययन का निर्देश
दिया। अत: शिक्षा मंत्रालय ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन डा0 डी0एस0 कोठारी की
अध्यक्षता में कर दी जिसने पत्राचार शिक्षा की प्रकृति लक्ष्य एवं संगठन के माध्यम से
अपने विचार दिये। यादव एव पण्डा (1996) के अनुसार इस समिति के मुख्य सुझाव
इस प्रकार थे-

  1. पत्राचार शिक्षा से सम्बंधित उपाधि के मानक व प्रशासन विश्वविद्यालयों से
    हो। 
  2. पत्राचार पाठ्यक्रम को विश्वविद्यालय की प्रथम उपाधि के लिये स्वीकश्त किया
    जाये। 
  3. शिक्षक एवं छात्र के मध्य सम्पर्क स्थापन हेतु सम्पर्क कक्षाओं का आयोजन
    किया जाये।
  4. शैक्षिक मानक ऊँचा रखने के लिये पाठ्यक्रम उच्च स्तर के विषय विशेषज्ञों का
    सहयोग से निर्मित हो। 
  5. पत्राचार माध्यम से कला और विज्ञान दोनों पाठ्यक्रम संचालित किये जाये।
    सर्वप्रथम कला एवं वाणिज्य संकाय संचालन में ही संगठनात्मक समस्यायें
    आयेगी पर बाद में विज्ञान पाठ्यक्रम को भी सम्मिलित किया जाये। 
  6. प्रथम डिग्री कोर्स नियमित कोर्स में लगने वाले अवधि से अधिक अर्थात् 3 वर्ष
    के बजाय 4 वर्ष हो। अत्यधिक मेधावी छात्रों के लिये अवधि तीन वर्ष की हो। 
  7. प्रथम वर्ष की शुल्क नामांकन हेतु अधिक व द्वितीय तथा तृतीय स्तर पर क्रमश:
    घटती जाना चाहिये। 

सन् 1970 के दशक में दूरस्थ शिक्षा ने अच्छा विकास किया। इस दशक में कई
संस्थानों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी प्रारम्भ किया। इस दशक में 1971 में हिमाचल
प्रदेश विश्वविद्यालय, 1972 में आधं्र एवं वेकटेश्वर विश्वविद्यालय, 1973 में आग्ल व
विदेशी संस्थान हैदराबाद, 1974 में पटना विश्वविद्यालय, 1975 में बाम्बे उत्कल
विश्वविद्यालय, 1976 में जम्मू-कश्मीर व राजस्थान विश्वविद्यालय, 1977 में उस्मानिया
व केरल विश्वविद्यालय, 1978 में इलाहाबाद एवं एस0एन0डी0टी0 महिला महाविद्यालय
बम्बई तथा 1979 में अन्ना मलाई व उदयपुर विश्वविद्यालयों ने पत्राचार पाठ्यक्रम प्रारम्भ
किया। इस दशक के साथ ही स्नात्कोत्तर पाठ्यक्रम भी संचालित करना प्रारम्भ हुआ।
1980 तक दूरस्थ शिक्षा परम्परागत विश्वविद्यालय से ही सम्बद्ध रही। किन्तु आध्र प्रदेश
सरकार के निर्णय के फलस्वरूप दूरस्थ शिक्षा का नया रूप देते हुये सन् 1982 मे प्रथम
मुक्त विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश मुक्त विश्वविद्यालय हैदराबाद की स्थापना कर दी ।
इसने सभी राज्यों को मुक्त विश्वविद्यालय खोलने के लिये प्रेरित किया।

शिक्षा आयोग (1964-66) की संस्तुति- 

दिल्ली विश्वविद्यालय ने सन ् 1962 में
विश्वविद्यालय स्तर पर पत्राचार पाठ्यक्रम प्रारम्भ किया। 1964-64 में गठित कोठारी
कमीशन ने दूरस्थ एवं पत्राचार पाठ्यक्रम पर स्पष्ट तरीके से टिप्पणी की-

‘‘शिक्षा की कोई ऐसी विधि उन लाखों लोगों के लिये होनी चाहिये जो स्वयं
के प्रयास पर निर्भर करते है। हमें लगता है कि पत्राचार या गश्ह अध्ययन ही इस प्रश्न
का उत्तर है। यह अच्छी प्रकार से जॉची परखी तकनीकी है। विभिन्न देश यू0एस0ए0,
स्वीडन, यू0एस0एस0आर0, जापान, आस्टे्रलिया जहां यह लम्बे समय से प्रयोग में लायी
जा रही है, इसके अतिरिक्त अपने छोटे से अनुभव के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय भी
इसका उदाहरण प्रस्तुत किया और यह हमें वश्हद स्तर पर प्रयास करने हेतु प्ररित कर
रहा है, और पत्राचार पाठ्यक्रम नियमित पाठ्यक्रमों से किसी भी मायने में कम है यह
सिद्ध करने का कोई आधार नहीं है। वाह्य अनुभव एवं भारतीय प्रयेाग यह परिणाम दे
रहे हैं कि पत्राचार पाठ्यक्रम को मजबूती दिया जाना चाहिये।’’

पत्राचार शिक्षा समिति की संस्तुति के फलस्वरूप भारत में सर्वप्रथम दिल्ली
विश्वविद्यालय ने आकस्मिक योजना के रूप में जुलाई 1962 में बी0ए0 डिग्री हेतु पत्राचार
पाठ्यक्रम प्रारम्भ किया। इस प्रयोग से अनेक विश्वविद्यालयों ने प्रेरित होकर दूरस्थ
शिक्षा तकनीकी को अपनाने पर विचार किया। सन् 1967 में विश्वविद्यालय अनुदान
आयोग ने पुन: पत्राचार पाठ्यक्रमों के प्रचार-प्रसार हेतु एक समिति का गठन किया।
इसके परिणाम स्वरूप 1968 में पंजाबी विश्वविद्यालय तथा 1969 में मेरठ विश्वविद्यालय
द्वारा पत्राचार पाठ्यक्रमों का प्रारम्भ हुआ। सन् 1985 तक लगभग 31 विश्वविद्यालयों
द्वारा यह दूरस्थ शिक्षा माध्यम अपना लिया गया था।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) – 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने काठे ारी कमीशन के सुझावों
को ही बल प्रदान करते हुये कहा कि- ‘‘मध्यावधि शिक्षा एवं पत्राचार शिक्षा का प्रचार-प्रसार विश्वविद्यालय स्तर पर
व्यापक स्तर पर किया जाना चाहिये। माध्यमिक स्तर पर भी यह सुविधा विकसित की
जानी चाहिये। माध्यमिक स्तर के विद्याथ्र्ाी, शिक्षक एवं उद्योग तथा कर्मचारियों को देने
के लिये इसको प्रचारित किया जाये। इस शिक्षा को पूर्ण अवधि शिक्षा के बराबर का दर्जा
दिया जाये। ये सुविधायें विद्यालय से कार्यों की ओर स्थानान्तरण करेगी और उन लोगों
के लिये भी लाभकर होगी जो अपने आपको शिक्षित तो करना चाहते हैं पर ऐसा कर
नही पाते।’’ राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने मुक्त अधिगम तन्त्र के लिये कुछ सुझाव दिये-

  1. अनुच्छेद 3:11 – शिक्षा प्िर क्रया का आवश्यक लक्ष्य जीवन पयर्न् त शिक्षा है,
    यह सार्वजनिक साक्षरता का पूर्वानुमान है। गश्हणियों, कृषि एवं उद्योग कार्मिक एवं
    व्यावसायिकों को यह सुविधा दी जायेगी कि वह अपने मनपसंद शिक्षा को प्राप्त कर
    सके।
  2. अनुच्छेद 4:13- पा्रैढ ़ एवं सतत् शिक्षा को पद्रान करने हेतु वृहद स्तर पर
    कार्यक्रम चलाया जायेगा। जिसमें मुक्त अधिगम भी समाहित हो।
    अनुच्छेद 5:35- मुक्त विश्वविद्यालय तन्त्र ने उच्च शिक्षा की सुिवधायें पद्रान
    करने के साथ लोकतंत्रीकरण हेतु शिक्षा का लोकतंत्रीकरण किया है।
  3. अनुच्छेद 5:36- 1985 में स्थापित इन्दिरा गाधीं मुक्त विश्वविद्यालय इन
    उद्देश्यों को पूरा करने हेतु दृढ़ की जायेगी।
  4. अनुच्छेद 5:37- इस मजबतू तत्रं को बडी सावधानी के साथ विकसित किया
    जाना चाहिये।
  5. अनुच्छेद 6:6- औपचारिक शिक्षा की कठारे नियमों के कारण से वचित
    लाखों लोगों को तकनीकि एवं प्रबंधकीय शिक्षा के लिये मुक्त अधिगम तंत्र से जोड़ा
    जाये। इन सभी के साथ पालिटेक्निक शिक्षा को भी जोड़ते हुये क्रियात्मकता को बढ़ाने
    हेतु ये क्रेडिट विधि का उपयोग कर निर्देशन व परामर्श की सशक्त सेवा प्रदान की
    जायेगी।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देश- 

1974 में विश्वविद्यालय अनुदान
आयोग ने पत्राचार और मुक्त शिक्षा के निम्न निर्देश दिया- ‘‘पत्राचार शिक्षा का उद्देश्य एक बहुत बड़ा उद्देश्य ऐसी वैकल्पिक शिक्षा को
प्रदान करना है जिससे कि एक बहुत बड़ी संख्या में लोग आगे का ज्ञान और
व्यावसायिक दक्षता हासिल कर सके। पत्राचार पाठ्यक्रम वास्तव उन लोगों के लिये
वरदान है जो बच्चे किन्हीं कारणवश औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से वंचित रहे है। जो
कि दुर्गम स्थानों के रहने वाले हैं, जो प्रेरणा और अभिवृत्ति के अभाव में आगे नहीं पढ़
सके पर अब पढ़ने के लिये अभिप्रेरित है और जो उच्च शिक्षा हेतु योग्यता रखते हुये
भी, औपचारिक शिक्षा संस्थानों में जगह नहीं पाये हैं, और जो जीवन को जीवन भर
चलने वाली प्रतिक्रिया मानते है।’’

इग्नू की स्थापना – 

इसे सन् 1985 में ससंद के एक अधिनियम के तहत स्थापित
किया है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना दूरस्थ शिक्षा के प्रचार-प्रसार एवं गुणात्मक
सुधार के लिये किया गया। सबसे अधिक इस बात पर बल दिया कि विश्वविद्यालय को
ऐसे कदम उठाने चाहिये कि मुक्त विश्वविद्यालय के शिक्षण, मूल्यांकन एवं शोध जैसे
कार्यों में भी गुणवत्ता आ सके।

दूर शिक्षा परिषद् (डी0ई0सी0) की स्थापना- 

मई 1991 में इग्नू के प्रबधं बोर्ड
ने एक परिनियम के तहत दूर शिक्षा परिषद् की स्थापना की इसके स्थापना के पीछे
मुख्य उद्देश्य या दूर एवं मुक्त विश्वविद्यालयों के उन्नति, समन्वयन एवं मानक तथा
गुणवत्ता को स्थापित करने हेतु कार्य करना था। विस्तर से इसके बारे में हम खण्ड तीन
में पढ़ेगे। पर इसके कार्यों की संक्षिप्त चर्चा यहां हम कर रहे हैं-

  1. दूरस्थ शिक्षा एवं मुक्त शिक्षा तन्त्र के प्रसार, समन्वय एवं गुणात्मक स्तर को
    बढ़ाना। 
  2. मुक्त विश्वविद्यालय एवं दूरस्थ शिक्षा संस्थानों के एक तंत्र (जाल) की
    प्रतिस्थापना करना। 
  3. दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के संचालन हेतु प्राथमिकता के तौर पर आवश्यक क्षेत्रों
    का ध्यान करना एवं संचालन में सहयोग देना। 
  4. अध्येता समूह की पहचान कर उनके लिये आवश्यक कार्यक्रमों का संचालन
    करवाना। 
  5.  दूरस्थ शिक्षा के लिये कार्मिक वर्ग का प्रशिक्षण देना। 
  6. मुक्त विश्वविद्यालयों एवं मुक्त शिक्षण संस्थानों को आवश्यक वित्तीय सहायता
    प्रदान करना जिससे कि ये विकास करें एवं आवश्यक प्रोजेक्ट्स करवाना। 

1992 की पुर्नरीक्षित राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 

1992 में भारत सरकार ने 1986 की
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का पुर्नरीक्षण करवाया। कुछ नये सुझाव इस प्रकार के निकले-

  1. अनुच्छेद 4:13- साक्षरता प्राप्त कर चुके एवं प्राथमिक शिक्षा प्राप्त लोगों एवं
    प्रौढ़ों के लिये एक सतत् एवं समन्वित कार्यक्रम संचालित करना जिससे कि
    लोग अपनी साक्षरता कौशल एवं जीवन तथा कार्यक्षेत्र में विकास कर सके।
    इनमें दूरस्थ शिक्षा को सम्मिलित करने का संकेत दिया गया।
  2. अनुच्छेद 5:35- मुक्त अधिगम प्रणाली ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविध्
    ााओं में विस्तार किया है, और शिक्षा का लोकतंत्रीकरण कर इसे जीवन पर्यन्त
    प्रक्रिया बनाया है। मुक्त अधिगम प्रणाली की लचीलेपन व नवाचार ने हमारे देश
    के लोगों की दिग्भ्रमित आवश्यकताओं को भी पूरा करने का प्रयास किया,
    खासकर जो व्यवसाय में लगे हुये हैं। 
  3. अनुच्छेद 5:36- 1985 में स्थापित इग्नू को उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु
    सुदश्ढ़ करना। 
  4. नुच्छेद 5:37- राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय को देश के सभी भागों में माध्यमिक
    शिक्षा को प्रदान करने हेतु सुदश्ढ़ किया जाये। 

    दूरस्थ शिक्षा पर केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार परिषद कमेटी- 

    सन् 1995 में
    दूरस्थ शिक्षा पर एक कमेटी गठित हुई जिसने प्रत्येक प्रदेश में एक मुक्त विश्वविद्यालय
    खोलने की सिफारिश की। इसके साथ ही मुक्त विश्वविद्यालयों को जाल के रूप में
    कार्य करने के लिये कहा जिससे कि संसाधनों का अपसी उपभोग, समान मानकों एवं
    स्तर का निर्धारण, विद्यार्थियों की गतिशीलता एवं प्रभावकारी छात्र सहयोग सेवायें
    विकसित हो उन्होनें इन मुक्त विश्वविद्यालय तंत्र के लिये निम्न मानक निर्धारित किये।

    1. कार्यक्रमों के बनाने एवं उत्पादित करने में विभिन्न संस्थाओं में नकल नहीं होना
      चाहिये। 
    2. किसी संस्था द्वारा तैयार किया अच्छा पाठ्यक्रम सभी मुक्त विश्वविद्यालय में
      उपलब्ध रहेगा। 
    3. जो संस्थान अपने ऊँचें स्तर के कार्यक्रम नहीं चला पा रहे हैं, वे इस नेटवर्क
      के संसाधनों एवं सम्वेत पाठ्यक्रमों का हिस्सा बन सकते हैं। 
    4. एक साथ कई संस्थानों के जुड़ने से तैयार तंत्र में विद्याथ्र्ाी सहायता सेवायें अर्थिाक प्रभावी ढंग से सम्पादित हो सकती हैं। इससे अलग से तंत्र स्थापित करने
      में होने वाले व्यय में कमी आयेगी। 
    5. मुक्त शिक्षा संस्थानों के नेटवर्क में औपचारिक शिक्षा संस्थानों को भी सम्मिलित
      कर पाठ्यक्रमों के निर्माण एवं नेटवर्क में प्रतिभाग हेतु सम्मिलित किया जा
      सकता है। यह नेटवर्क एक बड़े पैमाने में फैले अध्येताओं की विभिन्न
      कार्यक्रमों, अनुदेशन के माध्यम एवं भौतिक विभाजन की विशेषताओं के आधार
      पर सहयोग कर सकता है। 

    उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय- 

    पद्रेश वृहद आकार एवं
    जनसंख्या के कारण विभिन्न स्तर की शिक्षा की मांग को पूरा करना हमेशा से ही दुरूह
    कार्य होता है। औपचारिक उच्च शिक्षा संस्थान उच्च शिक्षा की मांग को पूरा करने में
    असमर्थ हो रहे थे, कुछ विश्वविद्यालयों ने सांध्यकालीन व पत्राचार पाठ्यक्रम संचालित
    कर आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास किया। इसके साथ ही व्यक्तिगत पाठ्यक्रम
    भी प्रस्तावित व संचालित किये, परन्तु अत्यधिक आवश्यकता को ध्यान में रखकर सन्
    1999 में इलाहाबाद में राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति प्रदान की
    गयी। इसने 15 अगस्त 1999 से कार्य करना प्रारम्भ किया। इसमें शैक्षिक एवं
    व्यावसायिक दोनों प्रकार के पाठ्यक्रम संचालित किये जाते हैं। इसका प्रमुख लक्ष्य
    प्रदेश के ग्रामीण एवं दूर-दराज के इलाकों के अध्येताओं एवं बालिकाओं, आर्थिक रूप
    से विपन्न तथा व्यावसायिकों को अच्छे जीवन व उत्थान हेतु उच्च शिक्षा की सुविधा
    प्रदान करना है।

    भारत में पत्राचार एवं दूरस्थ शिक्षा संस्थानों की राज्यवार स्थिति का चार्ट-

    क्षेत्र/राज्य-स्थापना वर्ष –

    1. दिल्ली 
      1. दिल्ली विश्वविद्यालय 1962
      2. जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय 1971
      3. इन्दिरा गांध राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय 1985
    2. हरियाणा 
      1. कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र 1976
    3. हिमाचल प्रदेश 
      1. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला 1971
    4. जम्मू एवं कश्मीर 
      1. जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू 1976
      2. कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर 1976
    5. पंजाब 
      1. पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला 1968
      2. पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ 1971
    6. राजस्थान 
      1. राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर 1976
      2. मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय,उदयपुर 1979
      3. मुक्त विश्वविद्यालय, कोटा 1987
    7. उत्तर प्रदेश 
      1. मेरठ विश्वविद्यालय, मेरठ 1969
      2. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 1978
      3. राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 1999
    8. मध्य क्षेत्र मध्य प्रदेश 
      1. भोपाल विश्वविद्यालय, भोपाल 1975
    9. पश्चिमी क्षेत्र
      महाराष्ट्र 
      1. बम्बई विश्वविद्यालय, बम्बई (मुम्बई) 1978
      2. एस0एन0डी0टी0महिला विश्वविद्यालय, बम्बई (मुम्बई) 1979
      3. पुणे विश्वविद्यालय, पुणे 1983
      4. यशवंत राव चव्हाण मुक्त विश्वविद्यालय 1989
    10. पूर्वी क्षेत्र
      आसाम 
      1. गुवाहाटी विश्वविद्यालय, गुवाहाटी 1996
      2. नार्थ ईस्टर्न हिल युनिवर्सिटी 1996
    11. बिहार 
      1. नालन्दा मुक्त विश्वविद्यालय 1996
      2. पटना विश्वविद्यालय, पटना 1974
      3. रॉची विश्वविद्यालय, रॉची 1985
    12. उड़ीसा 
      1. उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर 1975
    13. दक्षिण क्षेत्र आन्ध्र प्रदेश 
      1. आन्ध्र विश्वविद्यालय, विशाखापट्नम 1972
      2. श्री वेंकेटश्वर विश्वविद्यालय, तिरूपति 1972
      3. सेन्ट्रल इस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिस एण्ड फारेन 1973
      4. लैग्वजेज, हैदराबाद
        उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद 1977
      5. आन्ध्र प्रदेश मुक्त विश्वविद्यालय, हैदराबाद 1982
    14. कर्नाटक 
      1. मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर 1969
      2. बंगलौर विश्वविद्यालय, मैसूर 1979
    15. केरल 
      1. केरल विश्वविद्यालय, त्रिवेन्द्रम 1977
      2. कोचीन विश्वविद्यालय, कोचीन 1996
      3. कालीकट विश्वविद्यालय, कालीकट 1977
    16. तमिलनाडु 
      1. मदुरई कामराज विश्वविद्यालय, मदुरई 1971
      2. अन्नामलाई विश्वविद्यालय 1979
      3. मद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास 1980

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