औषधीय पौधों के नाम और उनके उपयोग

औषधीय पौधों के नाम और उपयोग

तुलसी के औषधीय उपयोग

  1. गरम होने के कारण खाॅंसी, ज्वर आदि में प्रयोग किया जाता है। 
  2. तुलसी के तेल में एंटी कैंसर गुण पाये जाते है। 
  3. यह हृदय के लिए गुणकारी है
  4. नेत्र विकारों में भी तुलसी का प्रयोग ब्राह्म व आभ्यान्तर दोनों प्रकार से किया जाता है। 
  5. इसके बीज का प्रयोग अधिक पेशाब होना में किया जाता है। 
  6. प्राचीन काल से ही इसका प्रयोग विभिन्न विषों के निराकरण के लिए किया जाता है।

पुदीना का औषधीय उपयोग

  1. दर्द वाले स्थानों में लेप चोट वाले स्थानों में लगाने व मुखदुर्गन्ध नाशन के लिए इसके रस से कुल्ला करते है। 
  2. इसकी पत्तियों का क्वाथ बुखार, पेट के दर्द, कष्टार्तव व रजोरोध में उपयोगी है। 
  3. मुॅंह के छाले, मसूड़ों की सूजन व दाॅत दर्द में भी यह लाभकर है।

कुमारी के औषधीय उपयोग

  1. यह मूर्छा, भ्रम व अनिद्रा में प्रयुक्त होता है। 
  2. यह उच्चरक्तचाप में उपयोगी है। 

शतावरी के औषधीय उपयोग

  1. यह वातपित्त शामक है। इससे सिद्ध तेलों का प्रयोग शिरोरोग, वातव्याधि व दौर्बल्य में करते है। 
  2. छोटी माता होने पर इसके पत्तों का लेप दाह शमक का काम करता है। 
  3. सभी आयु की स्त्रियों के लिए बल्य व रसायन है।

भृंगराज के औषधीय उपयोग

  1. भृंगराज बालों के लिए मुख्यरूप से प्रयोग की जाने वाली औषधि है। 
  2. यह किडनी और लीवर की कारगर औषधि है। 
  3. बालों का असमय सफेद होना, झड़ने में भृंगराज तैल का नियमित उपयोग लाभदायक होता है। 
  4. अनिद्रा में भी तेल लाभप्रद है। 

छोटी इलायची के औषधीय उपयोग

  1. यह श्वास व कास में भी लाभदायक है। 
  2. इसके बीजों का तेल पाचक तथा अम्लपित्त में लाभकर है। 
  3. यह नेत्र रोग, श्वास तथा दाॅंत व मसूड़ों के रोगों में लाभकर है।

पपीता के औषधीय उपयोग

  1. यह पाचन सम्बन्धी रोगों में लाभकर है। 
  2. इसके दूध का प्रयोग सोरायसिस तथा रिंगवर्म में किया जाता है। 

दालचीनी के औषधीय उपयोग

  1. यह माउथवॉश, मुखदुर्गन्ध नाशन है। 
  2. यह भारतीय भोजन में गर्म मसालों के रूप में प्रयोग किया जाता है। 
  3. यह दिल की धड़कन रुकना में उपयोगी है तथा कोलेस्ट्राल व ट्राइग्लिसराईड को कम करने के काम आता है। 
  4. यह अतिसार में भी उपयोगी है। 

धतूरा के औषधीय उपयोग

  1. यह श्वास रोग की उत्तम औषधि है। 
  2. इसके पत्र, पुष्प मजरी और बीज वेदना स्थापक, मादक गुण वाले होते है।

अदरख (सौंठ) के औषधीय उपयोग

  1. अदरख की चाय सर्दी जुकाम व कफ की उत्तम औषधि है।
  2. खून को पतला करने के गुण के कारण तथा कोलेस्ट्राॅंल को कम करने के कारण यह हृदय रोगों में प्रयोग किया जाता है। 
  3. अरूचि, उदरशूल, अतिसार तथा कास में भी यह लाभकर है। यह दीपन पाचन कर्म करता है। 
  4. यह पाचक है, अतः शरीर में उत्पन्न आम को नष्ट करता है।

गुड़मार के औषधीय उपयोग

  1. यह रक्त में शर्करा की उपस्थिति को नियंत्रित करता है 
  2. मधुमेह में प्रयोग किया जाता है। 
  3. यह पीलिया की कारगर औषधि है। 

अखरोट के औषधीय उपयोग

  1. इसके बीज पौष्टिक, बल्य एवं पोषक हैं 
  2. इसका तेल मासिक धर्म संबंधी विकारों में कारगर है। 

अनार के औषधीय उपयोग

  1. इसके रस से रक्त के कोलेस्ट्रोल की मात्रा नियंत्रित होती है। 
  2. इसकी छाल के काढ़े से मुख व कण्ठ रोगों में गरारे करते है। 
  3. इसके फलों में एन्टीआक्सीडेन्ट पाये जाते है।

सफेद मूसली के औषधीय उपयोग

  1. इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

रीठा के औषधीय उपयोग

  1. यह विशेष रूप से साबुन व शैंपू बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। 
  2. इसके फल के चूर्ण का नस्य अर्धावभेदक, मूर्छा, अपतंत्रक तथा श्वास में देते है।

शंखपुष्पी के औषधीय उपयोग

  1. यह  नाडि़यों के लिए बलप्रद है। 
  2. यह शीतवीर्य होने से रक्तस्तंभक है तथा उच्च रक्तचाप को कम करती है। 

गुडुची के औषधीय उपयोग

  1. घृत के साथ वात, शर्करा के साथ पित तथा मधु के साथ कफ विकारों में दिया जाता है। 
  2. कुष्ठ वातरक्त में इससे सिद्ध घृत का प्रयोग किया जाता है। 
  3. इसका सत्व जीर्ण ज्वर तथा दाह में प्रयोग करते हैं।

हरीतकी के औषधीय उपयोग

  1. इसके काढ़ा से मुख तथा गले के रोगों में कुल्ला करते है। 
  2. कोशिका शुद्धि के लिए हरीतकी सर्वश्रेष्ठ द्रव्य है।
  3. श्वेतप्रदर तथा गर्भाशय दौर्बल्य में प्रयुक्त होता है। 

बहेड़ा के औषधीय उपयोग

  1. इसका तेल चर्मरोगों में प्रयोग किया जाता है।
  2. भूनकर प्रयोग करने से कफ, कण्ठ शोथ तथा श्वास में फायदा मिलता है। 

आंवला के औषधीय उपयोग

  1. यह विटामिन सी का सर्वोत्तम वानस्पतिक स्रोत है अतः यह स्कर्वी रोग में शर्करा व दूध के साथ प्रयोग कराये जाने पर लाभदायक परिणाम देता है।
  2. यह हृदय के लिए बल्य हैं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
  3. यह एक उत्तम रसायन है तथा मधुमेह में भी लाभकर परिणाम दिखाता है।
  4. बालों के लिए लाभकारी है तथा बालों को सफेद होने तथा झड़ने से रोकता है। 

जामुन के औषधीय उपयोग

  1. इसकी छाल व फल उत्तम मधुमेह नाशक है। 
  2. इसके पत्ती का चूर्ण मसूड़ों को मजबूत बनाने के लिये देते हैं। 
  3. इसके बीज का चूर्ण रक्तप्रदर रक्तातिसार में देते है।

अजवाइन के औषधीय उपयोग

  1. यह कफवात विकारों में प्रयुक्त होता है। 
  2. बदहजमी से उत्पन्न विकारों में अजवायन चूर्ण एवं सेंधानमक मिलाकर देने से लाभ होता है।

हल्दी के औषधीय उपयोग

  1. शीतपित्त की उत्तम औषधि है।
  2. जीर्ण ज्वर, कुष्ठ व दौर्बल्य में उपयोगी है।

लौंग के औषधीय उपयोग

  1. मुख व कण्ठरोगों में चूसते है। 
  2. दाॅत दर्द में इसका लेप लाभदायक है। 
  3. चर्मरागों में लाभदायक है।

कालीमिर्च के औषधीय उपयोग

  1. कफवातजन्य विकारों में लाभकर है। 
  2. नाड़ी दौर्बल्य, हृद्दौर्बल्य में उपयोगी है। 
  3. कुष्ठ, चर्मरोगों में लेप करते हैं।

Bandey

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता (MSW Passout 2014 MGCGVV University) चित्रकूट, भारत से ब्लॉगर हूं।

Post a Comment

Previous Post Next Post